Friday, April 24, 2026
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सावधान…भीषण गर्मी का कहर: स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में, लू से बचाव के लिए जारी किए व्यापक दिशा-निर्देश…

बिलासपुर। प्रदेश में लगातार बढ़ते तापमान ने जनजीवन पर असर डालना शुरू कर दिया है। चिलचिलाती धूप और झुलसा देने वाली गर्म हवाओं के बीच अब लू (हीट स्ट्रोक) का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए आमजन और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य न सिर्फ लोगों को जागरूक करना है, बल्कि संभावित आपात स्थितियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य तंत्र को भी पूरी तरह तैयार रखना है।

राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जारी एडवाइजरी में स्पष्ट किया गया है कि तापमान में लगातार वृद्धि के चलते लू के मामलों में इजाफा हो सकता है। ऐसी स्थिति में थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे लू के लक्षणों को हल्के में न लें और समय रहते सावधानी बरतें।

लक्षणों को पहचानना है जरूरी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार लू के प्रमुख लक्षणों में तेज सिरदर्द, बुखार, चक्कर आना, उल्टी, शरीर में दर्द, अत्यधिक प्यास लगना, पेशाब कम आना और बेहोशी जैसी स्थितियां शामिल हैं। खासतौर पर यदि शरीर में अत्यधिक गर्मी महसूस हो और पसीना आना बंद हो जाए, तो यह गंभीर संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में तत्काल प्राथमिक उपचार और चिकित्सकीय सहायता बेहद जरूरी है।

बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
विशेषज्ञों का मानना है कि लू से बचाव पूरी तरह संभव है, बशर्ते सावधानियां बरती जाएं। दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना, धूप में निकलते समय सिर और कान को ढंकना, ढीले और सूती कपड़े पहनना, और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है। अधिक पसीना आने पर ओआरएस घोल का सेवन शरीर में पानी और लवण की कमी को पूरा करता है। यदि किसी को चक्कर या घबराहट महसूस हो, तो तुरंत छायादार स्थान पर आराम करना और ठंडे पेय पदार्थ लेना फायदेमंद होता है।

प्राथमिक उपचार से बच सकती है जान
लू से प्रभावित व्यक्ति को तुरंत ठंडी और हवादार जगह पर लिटाना चाहिए। उसके सिर पर ठंडे पानी की पट्टी रखना, शरीर पर ठंडे पानी का छिड़काव करना और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देना प्राथमिक उपचार के अहम हिस्से हैं। यदि स्थिति गंभीर हो, तो बिना देर किए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए।

अस्पतालों को भी सतर्क रहने के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने सभी शासकीय अस्पतालों को विशेष तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। ओपीडी में आने वाले मरीजों की लू के लक्षणों की जांच, कम से कम दो बेड आरक्षित रखना, वार्डों में कूलर या अन्य शीतलन व्यवस्था करना और ठंडे पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही ओआरएस कॉर्नर स्थापित करने, जीवनरक्षक दवाओं और इंट्रावेनस फ्लूइड की पर्याप्त उपलब्धता रखने पर भी जोर दिया गया है।

संवेदनशील वर्ग पर विशेष ध्यान
बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार व्यक्तियों को लू का खतरा अधिक होता है। ऐसे में इनके लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग ने जिला और ब्लॉक स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित करने और जरूरत पड़ने पर मोबाइल चिकित्सा दल तैनात करने के निर्देश भी दिए हैं।

सतर्कता ही सुरक्षा का आधार
गर्मी के इस कठिन दौर में थोड़ी सी जागरूकता और सतर्कता बड़े खतरे को टाल सकती है। स्वास्थ्य विभाग की अपील साफ है—पानी पीते रहें, धूप से बचें और लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराएं। समय पर उठाया गया एक छोटा कदम किसी की जान बचा सकता है।

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