बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों को रखने का मुद्दा एक बार फिर हाईकोर्ट के दरवाज़े तक पहुंचा। 15 हजार कैदियों की क्षमता वाले प्रदेश के जेलों में फिलहाल 20 हजार 500 से अधिक बंदी ठूंसे गए हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक चुनौती है बल्कि मानवाधिकार से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करती है।
सोमवार को इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान शासन की ओर से जानकारी दी गई कि इसी माह बेमेतरा के नए जेल का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा, जिससे कैदियों का दबाव कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है।
बिलासपुर के लिए निराशाजनक खबर यह रही कि यहां नए सेंट्रल जेल के निर्माण का मामला अब भी अटका हुआ है। बताया गया कि अब तक छह बार टेंडर प्रक्रिया रद्द हो चुकी है और सातवीं बार नया टेंडर निकाला जाएगा।
हाईकोर्ट ने इस देरी पर नाराज़गी जताते हुए शासन से 16 सितंबर तक शपथ पत्र के माध्यम से विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कैदियों की क्षमता से अधिक बंदी रखने का मामला हल्के में नहीं लिया जा सकता और सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने होंगे।
सूत्रों का मानना है कि अगर बेमेतरा और बिलासपुर के नए जेल समय पर तैयार हो जाते हैं, तो प्रदेश के जेलों में बंदियों की भीड़ को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। फिलहाल, ओवरक्राउडिंग की वजह से सुरक्षा, स्वास्थ्य और प्रबंधन से जुड़े जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं।