Friday, August 29, 2025
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कलेक्ट्रेट परिसर से आरोपी की गिरफ्तारी पर हंगामा, पुलिस ने आरोपों को किया खारिज, SSP बोले- न्याय सुनिश्चित होगा…

बिलासपुर।
बिलासपुर पुलिस ने एक वायरल वीडियो और उस पर उठ रहे सवालों के बीच प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट किया है कि आरोपी नारायण खरे की गिरफ्तारी कलेक्ट्रेट एवं एसपी कार्यालय के पास की गई थी। वीडियो में आरोपी के परिजन गिरफ्तारी का विरोध करते नज़र आ रहे हैं। पुलिस ने साफ कहा है कि गिरफ्तारी प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की अवैध दबिश या रिश्वतखोरी का मामला नहीं है, बल्कि आरोपी और उसके परिजनों ने जानबूझकर हंगामा खड़ा किया।

थाना सीपत में दर्ज अपराध क्रमांक 402/2025 में आरोपी नारायण खरे पिता बलदाउ प्रसाद खरे (46 वर्ष, निवासी नरगोडा) पर बीएनएस की धारा 296, 115(2), 351(2), 117(2), 118(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। मामला जमीन विवाद से जुड़ा हुआ है। पुलिस के अनुसार, नारायण खरे ने अपनी ही मां उर्मिला बाई से विवाद के दौरान मारपीट की थी, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं।

उर्मिला बाई 09 जून 2025 से 12 जुलाई 2025 तक सिम्स अस्पताल, बिलासपुर में भर्ती रहीं। इस दौरान उनका हाथ फ्रैक्चर हुआ। पुलिस का कहना है कि आरोपी का यह कृत्य न केवल पारिवारिक हिंसा है बल्कि गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

19 अगस्त को जब पुलिस आरोपी को पकड़ने कलेक्ट्रेट परिसर पहुंची, तो नारायण खरे और उसके परिजनों ने गिरफ्तारी का विरोध किया। वायरल वीडियो में यही दृश्य सामने आया। बाद में आरोपी और उसके परिजनों ने पुलिस पर “रात में दबिश देने” और “रिश्वत मांगने” के आरोप लगाए।

इन आरोपों को पुलिस ने सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि नारायण खरे पर पहले भी प्रतिबंधात्मक कार्यवाही दर्ज है। गिरफ्तारी की पूरी कार्रवाई कानूनी और पारदर्शी तरीके से की गई।

पुलिस ने बताया कि आरोपी नारायण खरे को 19 अगस्त, मंगलवार को ही कलेक्ट्रेट परिसर से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

एसएसपी का बयान

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने कहा कि यह मामला गंभीर है और आरोपी की गिरफ्तारी ज़रूरी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि नारायण खरे ने गिरफ्तारी से बचने कई प्रयास किए और पुलिस पर आरोप लगाकर भ्रम फैलाने की कोशिश की।

एसएसपी ने कहा,

“आरोपी ने अपनी मां पर हमला किया, जिसके चलते उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। ऐसे मामलों में पुलिस का दायित्व है कि न्याय दिलाया जाए। पुलिस पर लगाए गए आरोपों की जांच भी कराई जाएगी, लेकिन आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही होगी।”

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