Monday, February 2, 2026
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नवविवाहिता की संदिग्ध मौत: दहेज प्रताड़ना का एक और मामला, पति गिरफ्तार, सास और ननद फरार…

बिलासपुर।
शहर के चकरभाठा थाना क्षेत्र के बोदरी में एक नवविवाहिता की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। 8 सितंबर 2025 को एक महिला ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। प्रथम दृष्टया यह घटना घरेलू विवाद का मामला प्रतीत हुई, लेकिन जांच और परिजनों के बयानों ने इसे दहेज प्रताड़ना से जुड़ा गंभीर अपराध साबित किया।

मृतिका के परिजनों — पिता, माता और भाई — ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा कि मृतिका को उसके पति शाहिद कुरैशी, सास नशीबा कुरैशी और ननद अनाया कुरैशी द्वारा दहेज की मांग को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। परिजनों का आरोप है कि मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के चलते मृतिका गहरे अवसाद में थी और मजबूर होकर उसने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया।

मृतिका का पोस्टमार्टम कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कराया गया। 23 सितंबर 2025 को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्पष्ट हुआ कि यह आत्महत्या दहेज प्रताड़ना से जुड़ी हुई है। इसके आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 80(2) (दहेज मृत्यु) के तहत अपराध दर्ज किया।

मुख्य आरोपी एवं मृतिका का पति शाहिद कुरैशी (35 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 07, वाशुमंगलम के पीछे, चकरभाठा, बिलासपुर) को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। वहीं, शेष आरोपी नशीबा कुरैशी और अनाया कुरैशी की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि दोनों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

भारत में दहेज प्रताड़ना के मामलों पर रोक लगाने के लिए कानून मौजूद है। बीएनएस की धारा 80(2) (जो पूर्व में भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी से मेल खाती है) के तहत यदि विवाह के सात वर्ष के भीतर महिला की असामान्य या संदिग्ध मौत होती है और यह पाया जाता है कि उसे दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया था, तो इसे दहेज मृत्यु माना जाता है। ऐसे मामलों में पति या उसके परिजन दोषी पाए जाने पर कठोर सजा का प्रावधान है।

कानून होने के बावजूद देशभर में दहेज प्रताड़ना और उससे जुड़ी मौतों के मामले लगातार सामने आते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार हर साल हजारों महिलाएं दहेज की मांग पूरी न कर पाने के कारण प्रताड़ना झेलती हैं और इनमें से बड़ी संख्या आत्महत्या अथवा संदिग्ध मौत के मामलों की होती है।

सामाजिक जिम्मेदारी

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज को भी मानसिकता बदलनी होगी। दहेज की प्रथा न केवल महिलाओं के अधिकारों का हनन करती है बल्कि परिवारों को भी आर्थिक और मानसिक संकट में डालती है। जागरूकता, शिक्षा और कड़ी सामाजिक निंदा से ही इस कुरीति को खत्म किया जा सकता है।

पुलिस की अपील

इस मामले में पुलिस ने अपील की है कि यदि किसी महिला को दहेज प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है तो वह समय रहते इसकी शिकायत दर्ज कराए। पुलिस और प्रशासन ऐसे मामलों में पीड़िताओं की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए तत्पर है।

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