बिलासपुर।
मनरेगा के नाम परिवर्तन को लेकर पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल द्वारा की गई प्रेस वार्ता पर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अब भगवान राम के नाम को भी सत्ता हासिल करने का माध्यम बना चुकी है और विकास के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए योजनाओं के नाम बदलने की राजनीति कर रही है।
सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलकर “वीबीजी राम-जी” रखा जाना भाजपा की उसी राजनीति का हिस्सा है, जिसमें आधी हिंदी और आधी अंग्रेजी को तोड़-मरोड़कर सिर्फ इसलिए जोड़ा गया ताकि “राम” नाम आ जाए और भाजपा अपनी दुकान चला सके। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा का कोई भी नेता बिना देखे इस नाम का सही उच्चारण तक नहीं कर सकता।
शहर अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा को नाम बदलने की बजाय विकास की बड़ी लकीर खींचनी चाहिए, लेकिन वह सस्ती राजनीति कर वाहवाही लूटने में लगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने मनरेगा के तकनीकी पक्ष पर गंभीरता से विचार नहीं किया। भाजपा जिस 125 दिन की रोजगार गारंटी की बात कर रही है, उसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार को देनी होगी, जबकि पहले राज्य सरकार का योगदान मात्र 10 प्रतिशत था।
सिद्धांशु मिश्रा ने सवाल उठाया कि जब आज अधिकांश राज्य सरकारें पहले से ही कर्ज में डूबी हैं, तो क्या वे 40 प्रतिशत राशि जमा कर पाएंगी? उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार 40 प्रतिशत हिस्सा नहीं दे पाएगी तो केंद्र सरकार 60 प्रतिशत राशि जारी नहीं करेगी और ऐसी स्थिति में योजना अपने आप दम तोड़ देगी। यह भाजपा की एक बड़ी और सोची-समझी चाल है, जिसके जरिए वह मनरेगा जैसी जनहितकारी योजना को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। भाजपा नहीं चाहती कि देश के गरीबों को रोजगार मिले और वे सम्मानजनक, सुखी जीवन जी सकें।
महात्मा गांधी के नाम को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि महात्मा गांधी कांग्रेस के आदर्श हैं और कांग्रेस उनके विचारों पर चलती है। इसी कारण नेहरू के नाम के स्थान पर महात्मा गांधी का नाम योजना से जोड़ा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उससे जुड़े संगठनों का इतिहास शुरू से ही गांधी विरोधी रहा है। आजादी की लड़ाई में उनके हर निर्णय का विरोध किया गया और स्वतंत्र भारत में गांधीजी की हत्या गोडसे द्वारा की गई।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने विभिन्न राजनेताओं के नाम पर योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल को केवल गांधी के नाम पर आपत्ति है। जबकि वे यह भूल जाते हैं कि नेहरू-गांधी परिवार का इतिहास आजादी की लड़ाई से जुड़ा है। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लगभग 10 वर्ष जेल में बिताए, उनके पिता, माता, पत्नी, बहनें और बेटी तक स्वतंत्रता संग्राम में शामिल रहीं। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।
इसके विपरीत भाजपा के आदर्श पुरुष श्यामा प्रसाद मुखर्जी के इतिहास का जिक्र करते हुए सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि वे मुस्लिम लीग के साथ मिलकर बंगाल में वित्त मंत्री रहे थे। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर भाजपा से जुड़े संगठनों के पदाधिकारी आजादी के समय नाखून भी काटते, तो शायद उनके नाम पर भी योजनाएं चलाई जातीं। नेहरू की दरियादिली थी कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को देखते हुए उन्हें मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया।
अंत में सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि भाजपा को कांग्रेस का विरोध करने से पहले अपने आजादी के इतिहास को जानना चाहिए और नाम बदलने की राजनीति छोड़कर देश के गरीब और श्रमिक वर्ग के हित में वास्तविक काम करना चाहिए।


