बिलासपुर। शहर विधायक एवं पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने बिलासपुर में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस और विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए संसद में लाए गए नए विधेयक वीबी-जी राम-जी (विकास भारत—गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण) बिल को ग्रामीण भारत के भविष्य से जोड़ने वाला ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक वर्ष 2025 के अंत में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम में बड़े और निर्णायक संरचनात्मक बदलाव के लिए लाया गया है, ताकि ग्रामीण भारत को सिर्फ मजदूरी नहीं, बल्कि स्थायी विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।
अमर अग्रवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस और विपक्ष इस बिल को लेकर जानबूझकर भ्रम फैला रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि संसद में हुई लंबी बहस में सभी विपक्षी दलों ने हिस्सा लिया और पूरी चर्चा के बाद ही विधेयक पारित हुआ। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को ‘विकसित भारत’ और ‘राम’ शब्द से ही एलर्जी है, इसलिए वह तथ्यों के बजाय भावनात्मक उन्माद फैलाने की राजनीति कर रही है।
उन्होंने बताया कि नए विधेयक के तहत ग्रामीण परिवारों को अब 100 की जगह 125 दिन का रोजगार मिलेगा, जबकि अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में 150 दिन तक रोजगार सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह बताने से क्यों डर रही है कि इस कानून से गरीबों को पहले से ज्यादा काम, ज्यादा पैसा और ज्यादा सुरक्षा मिलने वाली है।
रोजगार योजनाओं के इतिहास पर हमला बोलते हुए अमर अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस को आज नाम बदलने की याद आ रही है, लेकिन जब 1980 के दशक में इंदिरा गांधी के समय योजनाओं का समेकन हुआ, राजीव गांधी के दौर में जवाहर रोजगार योजना बनी और 2004-05 में नरेगा को मनरेगा बनाया गया, तब कांग्रेस ने कभी आपत्ति नहीं की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब तब योजनाओं के नाम बदले गए, तब कांग्रेस का नैतिक विवेक कहां था।
उन्होंने कांग्रेस पर एक परिवार को महिमामंडित करने की राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस ने योजनाओं, संस्थानों और पुरस्कारों को एक ही परिवार के नाम पर सीमित कर दिया। उन्होंने तीखे स्वर में पूछा कि सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल या अन्य राष्ट्रनायकों के नाम पर योजनाएं क्यों नहीं रखी गईं। उन्होंने कहा कि एक ही परिवार के नाम पर सैकड़ों योजनाएं चलाना कांग्रेस की मानसिकता को उजागर करता है।
अमर अग्रवाल ने कहा कि समय के साथ योजनाओं में बदलाव जरूरी होता है और यही जिम्मेदार शासन की पहचान है। नई योजना में भुगतान व्यवस्था को सख्त और तेज किया गया है—जहां पहले मजदूरी का भुगतान 15 दिन में होता था, अब इसे साप्ताहिक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि वह मजदूरों के हित में है या भ्रष्ट व्यवस्था के साथ।
मनरेगा में हुए कथित भ्रष्टाचार पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि पहले अर्थहीन और बेकार कार्यों को रोजगार दिखाकर सरकारी धन की लूट की जाती थी। नई योजना में जीपीएस, एआई आधारित निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग को शामिल किया गया है, जिससे एक-एक रुपये का हिसाब रहेगा और पैसा सीधे लाभार्थी तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत विकास योजनाओं के तहत अब सड़क, जल संरचना और स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण होगा, न कि कागजों पर काम।
केंद्र-राज्य हिस्सेदारी को लेकर कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए अमर अग्रवाल ने कहा कि यह कोई नई व्यवस्था नहीं है। कई योजनाओं में शुरुआत में केंद्र और राज्य का अनुपात बदला गया है। उन्होंने आंकड़े गिनाते हुए कहा कि 1980 के दशक में देश में गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की संख्या 24 प्रतिशत थी, जो आज घटकर 4 से 5 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने कहा कि 2014 से 2025 के बीच केंद्र सरकार ने राज्यों को रिकॉर्ड वित्तीय सहायता दी है, लेकिन अब राज्यों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी।
नाम बदलने पर कांग्रेस की आपत्ति को राजनीतिक नौटंकी बताते हुए अमर अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल नाम नहीं बदल रहे, बल्कि देश की सोच और आत्मसम्मान बदल रहे हैं। राजपथ का कर्तव्य पथ बनना और प्रधानमंत्री कार्यालय का सेवक तीर्थ कहलाना इसी बदलाव का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बदलाव से डर लगता है, क्योंकि बदलाव से उसका झूठा नैरेटिव टूटता है।
आजीविका मिशन को योजना से जोड़ने पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सोच सिर्फ मजदूरी तक सीमित रही है, जबकि मोदी सरकार की सोच आत्मनिर्भर भारत की है। इसी कारण योजना में स्किल डेवलपमेंट, प्रशिक्षण और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को जोड़ा गया है, ताकि ग्रामीण युवा और महिलाएं लंबे समय तक सशक्त बन सकें।
महात्मा गांधी और राम के नाम को लेकर उठे विवाद पर उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि महात्मा गांधी स्वयं श्रीराम के उपासक थे और राम पूरे भारत की आस्था हैं। गांधी और राम के नाम पर राजनीति करना कांग्रेस की बौखलाहट को दर्शाता है।
केंद्र-राज्य हिस्सेदारी को लेकर उन्होंने बताया कि 60:40 का अनुपात तय किया गया है। उन्होंने कहा कि विकास आसान नहीं होता, लेकिन इच्छाशक्ति हो तो चुनौती भी अवसर बन जाती है। योजना के तहत निर्णय की इकाई ग्राम पंचायत ही रहेगी और एआई आधारित निगरानी से पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।


