बिलासपुर, 8 जनवरी 2026।
भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), रायपुर द्वारा छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक दिवसीय क्षेत्रीय मीडिया कार्यशाला ‘वार्तालाप’ का आयोजन किया गया। कार्यशाला का केंद्रीय विषय ‘विकसित भारत—गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ रहा, जिसे जी-राम-जी (VB-GRAM G) अधिनियम, 2025 के रूप में मनरेगा में युगांतकारी सुधार के तौर पर प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री तोखन साहू ने कहा, “गाँव सशक्त होंगे, तभी विकसित भारत का संकल्प साकार होगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि जी-राम-जी अधिनियम केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को निर्णय, विकास और जवाबदेही का केंद्र बनाने की एक आधुनिक रूपरेखा है। इस अधिनियम का उद्देश्य बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर सीधा लाभ हस्तांतरण (DBT) को मजबूत करना और ग्राम सभाओं को वास्तविक निर्णय शक्ति प्रदान करना है।
मंत्री साहू ने बताया कि नए अधिनियम के तहत रोजगार की गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है, वहीं मजदूरी भुगतान साप्ताहिक (7 दिन) किया गया है, जिससे श्रमिकों की आय सुरक्षा और नकदी प्रवाह बेहतर होगा। मिशन का फोकस केवल रोजगार सृजन तक सीमित नहीं, बल्कि आधुनिक ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर और टिकाऊ उत्पादक संपत्तियों के निर्माण के जरिए गाँव के अंतिम व्यक्ति की आय बढ़ाने पर है।
उन्होंने आगे कहा कि ‘विकसित भारत @2047’ के विजन के अनुरूप ग्राम पंचायतों को विकास मापदंडों के आधार पर A, B और C श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। साथ ही, योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायतों को ‘पीएम गति शक्ति मिशन’ से जोड़ा जा रहा है, ताकि विभिन्न विभागों के साथ एकीकृत योजना बन सके और परिणाम समयबद्ध मिलें।
कार्यक्रम में बिलासपुर जिला पंचायत की सहायक परियोजना अधिकारी (मनरेगा) अनुराधा शुक्ला ने कहा कि जी-राम-जी मिशन ग्रामीण क्षेत्रों में आय की सुरक्षा और स्थिरता का मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया कि योजना के तहत जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका-संबंधित ढांचा और जलवायु परिवर्तन से निपटने जैसे चार प्रमुख फोकस क्षेत्रों पर काम होगा।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी, डिजिटल अटेंडेंस, जियो-टैगिंग और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अपनाया जा रहा है, जिससे धन की हेराफेरी पर प्रभावी अंकुश लगेगा। प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण के लिए प्रशासनिक मद की सीमा 6% से बढ़ाकर 9% कर दी गई है, ताकि योजना संचालन और क्षमता विकास में सहूलियत मिले।
कार्यशाला में जी-राम-जी अधिनियम के तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण हुआ। प्रश्नोत्तर सत्र में पत्रकारों ने अधिनियम की बारीकियों, क्षेत्रीय विकास और छत्तीसगढ़ में इसके प्रभाव को लेकर मंत्री से सवाल किए।
समापन पर यह स्पष्ट संदेश उभरा कि ‘वार्तालाप’ जैसे मंच न केवल केंद्र सरकार की दूरदर्शी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाते हैं, बल्कि ग्रामीण छत्तीसगढ़ के समावेशी विकास के लिए मीडिया और प्रशासन के बीच मजबूत साझेदारी भी बनाते हैं।
कुल मिलाकर, जी-राम-जी (VB-GRAM G) अधिनियम, 2025 ग्रामीण भारत को रोजगार-केंद्रित दृष्टि से आगे बढ़ाकर टिकाऊ विकास, पारदर्शिता और स्थानीय सशक्तिकरण की राह पर ले जाने वाला निर्णायक कदम साबित हो रहा है।


