बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में स्वामी आत्मानंद स्कूलों की नर्सरी कक्षाएं बंद किए जाने के आदेश को लेकर सियासत गरमा गई है। बिलासपुर के पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने बीजेपी की विष्णुदेव साय सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे “शिक्षा विरोधी और षड्यंत्रपूर्ण फैसला” बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार बाल वाटिका खोलने का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन उसी बहाने नौनिहालों के हाथ से कॉपी-पेंसिल छीन ली गई और निर्दोष शिक्षकों को बेरोजगारी की ओर धकेल दिया गया।
शैलेष पांडेय ने आरोप लगाया कि हाल ही में कलेक्टर बिलासपुर द्वारा नर्सरी कक्षाएं बंद करने और शिक्षकों को नौकरी से हटाने का नोटिस जारी किया गया है। यह फैसला न सिर्फ बच्चों के भविष्य पर कुठाराघात है, बल्कि इससे यह भी साफ हो गया है कि सरकार को “स्वामी आत्मानंद” नाम और कांग्रेस से किस हद तक चिढ़ है। उन्होंने कहा कि एक झटके में बच्चों की पढ़ाई छीन ली गई और शिक्षक आज डर और असमंजस में भटक रहे हैं, क्योंकि उनकी रोज़ी-रोटी पर सीधा हमला हुआ है।
पूर्व विधायक ने डीएमएफ फंड की कमी का हवाला दिए जाने पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह कहकर नर्सरी बंद की कि डीएमएफ की नई गाइडलाइन आ गई है और फंड नहीं है, लेकिन यदि सरकार की नीयत साफ होती तो नए स्कूल खोलने के साथ-साथ पुराने स्कूलों को भी चलाया जा सकता था। “नए नाम से स्कूल खोलने के लिए पुराने स्कूलों को बंद करना किस तरह का नियम और धर्म है?” — यह सवाल आज हर अभिभावक के मन में है।
शैलेष पांडेय ने यह भी याद दिलाया कि बीजेपी सरकार के पिछले कार्यकाल में पंद्रह वर्षों में हजारों स्कूल बंद किए गए थे और अब एक बार फिर वही नीति दोहराई जा रही है। उन्होंने कहा कि जब से बीजेपी सत्ता में आई है, शिक्षा उसकी प्राथमिकता में नहीं रही। बिलासपुर को शिक्षा के क्षेत्र में पीछे धकेलने का काम लगातार किया जा रहा है और इसका खामियाजा मासूम बच्चे भुगत रहे हैं।
उन्होंने भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि जिन बच्चों को यह भी नहीं पता कि सरकार क्या होती है, उनके मन में स्कूल बंद होने से पढ़ाई को लेकर डर बैठ गया है। “बचपन में ही शिक्षा से भय पैदा करना किसी भी जिम्मेदार सरकार का काम नहीं हो सकता,” उन्होंने कहा।
अंत में शैलेष पांडेय ने सरकार से मांग की कि स्वामी आत्मानंद स्कूलों की नर्सरी कक्षाएं तत्काल बहाल की जाएं, शिक्षकों की नौकरियां सुरक्षित की जाएं और बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे इस कथित षड्यंत्र को रोका जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो जनआंदोलन किया जाएगा और बच्चों व शिक्षकों की आवाज़ को सड़क से सदन तक उठाया जाएगा।


