बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में विकास के नाम पर हो रही कार्रवाई और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर अब विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) यानी SUCI (C) ने बिलासपुर के जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक मांग पत्र प्रेषित किया है, जिसमें शहर के गरीबों की बेदखली, स्मार्ट मीटर की मार और मनरेगा में कटौती जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
1. स्मार्ट सिटी के नाम पर ‘उजाड़’ का खेल
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मुद्दा गरीब बस्तियों के विस्थापन का उठाया गया है। SUCI(C) का आरोप है कि स्मार्ट सिटी और सौंदर्यीकरण के नाम पर नगर निगम द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना, मुआवजे या पुनर्वास की व्यवस्था किए गरीबों के घर तोड़े जा रहे हैं। पत्र में विशेष रूप से इंद्रपुरी मोहल्ले का जिक्र करते हुए मांग की गई है कि बिना आवास दिए तोड़फोड़ की कार्रवाई तुरंत रोकी जाए और जिन लोगों के घर तोड़े गए हैं, उन्हें जमीन और ₹5 लाख का मुआवजा दिया जाए।
2. स्मार्ट मीटर और बढ़ते बिजली बिल की चुनौती
पार्टी ने बिजली के निजीकरण और पुराने डिजिटल मीटरों को हटाकर स्मार्ट मीटर लगाने का कड़ा विरोध किया है। उनका तर्क है कि इन मीटरों की वजह से बिजली बिलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है, जिससे गरीब परिवारों के लिए भुगतान करना असंभव हो गया है। मांग की गई है कि स्मार्ट मीटर लगाना बंद किया जाए और ‘हाफ बिजली बिल योजना’ को पुनः सुचारू रूप से लागू किया जाए।
3. बुनियादी सुविधाओं का अभाव और परिवहन संकट
शहर के मोहल्लों में नालियों की सफाई न होने और शुद्ध पेयजल की कमी पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके साथ ही, ज्ञापन में कहा गया है कि शहर के भीतर सिटी बस सेवा की कमी के कारण मजदूरों को अपने काम पर जाने के लिए अपनी दिहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा यातायात पर खर्च करना पड़ता है।
4. मनरेगा में कटौती और शिक्षा पर प्रहार
SUCI(C) ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि मनरेगा के तहत मिलने वाले 150 दिनों के रोजगार के अधिकार को घटाकर 125 दिन करने की योजना बनाई जा रही है, जो मजदूरों के हक को छीनने जैसा है। साथ ही, स्वामी आत्मानंद स्कूलों में नर्सरी कक्षाओं को खत्म करने के निर्णय को भी वापस लेने की मांग की गई है।
SUCI(C) की प्रमुख मांगें एक नजर में:
* आवास का अधिकार: गरीबों को उजाड़ना बंद हो; विस्थापितों को जमीन और ₹5 लाख मुआवजा मिले।
* बिजली: स्मार्ट मीटर लगाना बंद हो और निजीकरण पर रोक लगे।
* परिवहन: शहर के प्रत्येक क्षेत्र में सिटी बस की व्यवस्था हो।
* स्वच्छता: नालियों की नियमित सफाई और पर्याप्त साफ पानी की आपूर्ति हो।
* शिक्षा: आत्मानंद स्कूलों में नर्सरी शिक्षा जारी रहे।
यह ज्ञापन स्पष्ट करता है कि विकास की चकाचौंध के बीच शहर का एक बड़ा तबका असुरक्षित महसूस कर रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन बुनियादी मांगों पर क्या रुख अपनाता है और क्या ‘स्मार्ट सिटी’ की परिभाषा में गरीबों के सिर पर छत और दो वक्त की रोटी को प्राथमिकता दी जाएगी।


