बिलासपुर। देशभर में पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और परिणामों में लगातार हो रही देरी को लेकर कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी “छात्रों की गूंज” अभियान के तहत बिलासपुर पहुंचे मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की परीक्षा व्यवस्था आज भरोसे के गंभीर संकट से गुजर रही है और करोड़ों युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
प्रेस वार्ता में जयवर्धन सिंह ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में देश की लगभग हर बड़ी परीक्षा किसी न किसी विवाद, पेपर लीक या प्रशासनिक विफलता की शिकार हुई है। ऐसे में युवाओं का विश्वास लगातार टूट रहा है। उन्होंने कहा कि जब छात्र सालों तक मेहनत कर परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और फिर परीक्षा प्रणाली ही सवालों के घेरे में आ जाती है, तो यह केवल प्रशासनिक असफलता नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है।
कांग्रेस नेता ने इस मुद्दे पर पार्टी की तीन प्रमुख मांगें भी सामने रखीं। पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और एनटीए की जवाबदेही तय करने की है। दूसरी मांग परीक्षा प्रक्रिया की पूरी सप्लाई चेन—पेपर सेटिंग, प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन और परीक्षा केंद्रों—का स्वतंत्र ऑडिट कराए जाने की है ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। तीसरी मांग परीक्षा, परिणाम और भर्ती प्रक्रियाओं के लिए एक निश्चित वार्षिक कैलेंडर लागू करने की है, जिससे छात्रों को अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।
हालांकि प्रेस वार्ता का सबसे चर्चित क्षण तब आया जब जयवर्धन सिंह से पूछा गया कि यदि कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पेपर लीक और भ्रष्टाचार जैसी घटनाएं हो रही हैं, तो फिर प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग क्यों नहीं की जा रही? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं के लिए सबसे पहले जवाबदेही केंद्रीय शिक्षा मंत्री की बनती है और उनका इस्तीफा एक स्पष्ट संदेश देगा कि सरकार जवाबदेह है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस त्याग और जवाबदेही की राजनीति में विश्वास करती है और उदाहरण देते हुए कहा कि देश ने त्याग की राजनीति का सबसे बड़ा उदाहरण सोनिया गांधी के रूप में देखा है। वहीं भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के मोह में जवाबदेही से बचने की कोशिश की जा रही है।
जयवर्धन सिंह ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि परीक्षा व्यवस्था से जुड़े कुछ कार्यों के लिए ऐसी निजी संस्थाओं को टेंडर दिए गए, जिन्हें पहले ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था। उनका दावा था कि इन संस्थाओं को दोबारा अवसर देने का निर्णय कई सवाल खड़े करता है और इसी कारण कांग्रेस लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है।
कांग्रेस के “छात्रों की गूंज” अभियान के जरिए पार्टी युवाओं के बीच परीक्षा प्रणाली, रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय बहस का विषय बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक बताकर खारिज करती रही है। लेकिन इतना तय है कि पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर बड़ा विमर्श बनने जा रहा है।
देश के करोड़ों छात्र आज यही सवाल पूछ रहे हैं कि उनकी मेहनत का मूल्य कौन सुनिश्चित करेगा और परीक्षा व्यवस्था पर फिर से भरोसा कैसे बहाल होगा। कांग्रेस का यह अभियान इसी सवाल को केंद्र में लाने की कोशिश माना जा रहा है।


