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बिलासपुर में ‘नकली खाद फैक्ट्री’ का शक! होटल के ऊपर गोदाम से 14 हजार किलो-लीटर माल जब्त, किसानों की जेब पर डाका डालने वाले नेटवर्क की जांच शुरू…

बिलासपुर में किसानों की मेहनत और फसलों के भविष्य से कथित तौर पर खिलवाड़ करने वाले एक बड़े नेटवर्क की आशंका ने कृषि विभाग को भी चौंका दिया है। सिरगिट्टी के बनाक चौक स्थित एक गोदाम पर मारे गए छापे में 14 हजार किलो/लीटर से अधिक कीटनाशक और जैव उर्वरक जब्त किए गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मौके से बड़ी संख्या में खाली बोरियां भी मिली हैं, जिससे संदेह गहरा गया है कि इन बोरियों में सामग्री भरकर उसे असली ब्रांड के नाम पर बाजार में बेचा जा रहा था।

कृषि विभाग की यह कार्रवाई सिर्फ एक गोदाम तक सीमित नहीं मानी जा रही। इसने जिले में नकली खाद और कीटनाशकों के संभावित कारोबार पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि यह आशंका सही साबित होती है तो इसका सीधा मतलब होगा कि किसानों को असली खाद के नाम पर नकली उत्पाद थमाए जा रहे थे और उनकी फसल, मेहनत तथा लाखों रुपये दांव पर लगाए जा रहे थे।

छापे के दौरान जिस दो मंजिला भवन में गोदाम मिला, उसके दूसरे तल पर होटल संचालित होने की जानकारी भी सामने आई। ऐसे भवन में बड़ी मात्रा में कृषि रसायनों का भंडारण न केवल नियमों पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय है। आखिर इस तरह के भंडारण की अनुमति किस आधार पर दी गई और क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी थी? यह भी जांच का विषय बन गया है।

प्रारंभिक जांच में कृषि विभाग को गोदाम में दो कंपनियों के नाम से रखी सामग्री मिली है। विभाग अब यह भी पता लगा रहा है कि गोदाम संचालक के पास भंडारण और विक्रय का वैध लाइसेंस था या नहीं। अधिकारियों के अनुसार विभाग के रिकॉर्ड में इस संबंध में कोई आवेदन या पूर्व सूचना उपलब्ध नहीं मिली है।

हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि जब्त किया गया पूरा स्टॉक नकली है। विभाग ने सभी संदिग्ध कीटनाशकों और उर्वरकों के नमूने प्रयोगशाला भेज दिए हैं। अब लैब रिपोर्ट ही तय करेगी कि यह महज अनियमित भंडारण का मामला है या फिर किसानों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का खेल चल रहा था।

यह कार्रवाई इसलिए भी अहम है क्योंकि नकली खाद और कीटनाशकों का असर केवल एक किसान तक सीमित नहीं रहता। इससे फसल की गुणवत्ता गिरती है, उत्पादन कम होता है, लागत बढ़ती है और किसान आर्थिक रूप से बुरी तरह प्रभावित होता है। कई बार किसान खराब उत्पादन का कारण मौसम या मिट्टी को मान लेते हैं, जबकि असली वजह नकली कृषि उत्पाद निकलते हैं।

कृषि विभाग का कहना है कि जिले में कालाबाजारी, अवैध भंडारण और नकली खाद-कीटनाशकों के कारोबार पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। यदि प्रयोगशाला की रिपोर्ट में सामग्री नकली पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कृषि कानूनों सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिरगिट्टी का यह गोदाम किसी बड़े नेटवर्क की सिर्फ एक कड़ी है, या फिर इसके तार जिले और प्रदेश के अन्य हिस्सों तक जुड़े हुए हैं? लैब रिपोर्ट और आगे की जांच इस पूरे मामले की परतें खोलेंगी। फिलहाल कृषि विभाग की इस कार्रवाई ने नकली खाद के संभावित कारोबार पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है और किसानों की निगाहें अब जांच के अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हैं।

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