नई दिल्ली/बिलासपुर, 30 जुलाई। वर्षों से छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच विवाद का कारण बने महानदी जल बंटवारे के मुद्दे पर आखिरकार समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू की पहल पर गुरुवार को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के बीच उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई। इस बैठक को महानदी विवाद के समाधान की दिशा में लंबे समय बाद हुई सबसे अहम राजनीतिक पहल माना जा रहा है।
बताया गया कि केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से मुलाकात कर महानदी जल विवाद के शीघ्र समाधान के लिए दोनों राज्यों के बीच संवाद शुरू कराने का आग्रह किया था। उनके प्रयासों के बाद यह महत्वपूर्ण बैठक संभव हो सकी।
बैठक में दोनों राज्यों ने महानदी के जल बंटवारे, नदी बेसिन के उपयोग, सिंचाई परियोजनाओं, पेयजल आवश्यकताओं और भविष्य की जल जरूरतों सहित विभिन्न विषयों पर अपना-अपना पक्ष विस्तार से रखा। छत्तीसगढ़ ने अपने वैधानिक जल अधिकारों, किसानों के हितों, सिंचाई विस्तार तथा औद्योगिक एवं पेयजल आवश्यकताओं को प्रमुखता से सामने रखा। वहीं ओडिशा ने भी अपनी चिंताओं और आवश्यकताओं से केंद्र सरकार को अवगत कराया।
बैठक सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक वातावरण में संपन्न हुई। दोनों राज्यों ने इस बात पर सहमति जताई कि विवाद का समाधान टकराव के बजाय संवाद और आपसी सहयोग के माध्यम से निकाला जाएगा। माना जा रहा है कि आने वाले समय में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर भी वार्ताओं का दौर जारी रहेगा।
बैठक के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने इसे ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि महानदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि दोनों राज्यों की करोड़ों जनता की जीवनरेखा है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार के समन्वय, दोनों राज्यों की सकारात्मक सोच और निरंतर संवाद से इस लंबे समय से लंबित विवाद का न्यायसंगत, व्यावहारिक और स्थायी समाधान निकलेगा।
महानदी जल विवाद लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और कानूनी मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में दोनों मुख्यमंत्रियों का एक मंच पर बैठकर समाधान की दिशा में बातचीत करना भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यदि यह संवाद आगे भी जारी रहता है, तो किसानों, उद्योगों और आम नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसा समाधान निकल सकता है, जिससे दोनों राज्यों के बीच वर्षों से चला आ रहा विवाद समाप्त होने की उम्मीद मजबूत होगी।


