बिलासपुर। मरीजों की सेवा में दिन-रात जुटे सिम्स के MBBS इंटर्न डॉक्टर अब अपने हक और मेहनत की कीमत को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर में कार्यरत इंटर्न डॉक्टरों ने मासिक स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मौजूदा 15,900 रुपये मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर न्यूनतम 30,000 रुपये करने की मांग की है।
डॉक्टरों का कहना है कि इंटर्नशिप अब केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रह गई है। अस्पताल की रोजमर्रा की चिकित्सा व्यवस्था में इंटर्न डॉक्टर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ओपीडी से लेकर वार्ड, इमरजेंसी और मरीजों की देखभाल तक वे लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कई परिस्थितियों में उन्हें 24 से 36 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है। इसके बावजूद महीने के अंत में मिलने वाला स्टाइपेंड महज 15,900 रुपये है।
काम डॉक्टरों जैसा, स्टाइपेंड इतना कम क्यों?
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने सवाल उठाया है कि जब इंटर्न डॉक्टर अस्पताल की नियमित चिकित्सा व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं और मरीजों की देखभाल में लगातार जिम्मेदारी निभाते हैं, तो उनके स्टाइपेंड का निर्धारण उनकी मेहनत और जिम्मेदारियों के अनुरूप क्यों नहीं किया जा रहा है?
एसोसिएशन ने दूसरे राज्यों की तुलना में छत्तीसगढ़ में MBBS इंटर्न के स्टाइपेंड को काफी कम बताया है। ज्ञापन में पड़ोसी राज्य ओडिशा का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि वहां इंटर्न डॉक्टरों को करीब 44,319 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाता है। वहीं कई अन्य राज्यों में भी यह राशि 30 हजार रुपये या उससे अधिक है।
एक ही मेडिकल डिग्री, लगभग समान प्रशिक्षण और मरीजों की सेवा की जिम्मेदारी, लेकिन स्टाइपेंड में इतना बड़ा अंतर। यही अंतर अब छत्तीसगढ़ के इंटर्न डॉक्टरों के लिए बड़ा सवाल बन गया है।
वर्षों से मांग, अब भी शासन के विचाराधीन
एसोसिएशन का कहना है कि स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कोई नई नहीं है। डॉक्टरों की ओर से पहले भी संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन दिए जा चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्री और अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर भी समस्या से अवगत कराया गया है।
डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें समय-समय पर यही जानकारी दी गई कि स्टाइपेंड बढ़ाने से संबंधित प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है। लेकिन अब इंटर्न डॉक्टर चाहते हैं कि यह प्रक्रिया केवल फाइलों तक सीमित न रहे और जल्द ठोस निर्णय लिया जाए।
15,900 से सीधे 30 हजार की मांग
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने इस बार अपनी मांग स्पष्ट कर दी है। छत्तीसगढ़ में MBBS इंटर्न डॉक्टरों का मासिक स्टाइपेंड 15,900 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 30,000 रुपये किया जाए।
डॉक्टरों का कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक राहत की मांग नहीं है। यह उनके श्रम, समय, जिम्मेदारी और मरीजों की सेवा के प्रति सम्मान का सवाल है। लंबे समय तक ड्यूटी करने वाले इंटर्न डॉक्टरों को उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप स्टाइपेंड मिलना चाहिए।
अब शासन के फैसले पर नजर
सिम्स जैसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान में इंटर्न डॉक्टर अस्पताल की व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या और काम के दबाव के बीच कम स्टाइपेंड को लेकर उठी आवाज अब जिला प्रशासन तक पहुंच चुकी है।
अब देखना होगा कि 15,900 रुपये के स्टाइपेंड पर 24 से 36 घंटे की ड्यूटी करने वाले इंटर्न डॉक्टरों की मांग पर शासन कब फैसला करता है। वर्षों से चल रही प्रक्रिया के बीच इस बार डॉक्टरों को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि निर्णय का इंतजार है।


