बिलासपुर। रेलवे स्टेशन से सटे आरपीएफ कॉलोनी जैसे संवेदनशील इलाके में रेलवे ठेकेदार के सुपरवाइजर की हत्या ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस क्षेत्र में आरपीएफ, जीआरपी और स्थानीय पुलिस की निगरानी रहती है, वहीं पानी टंकी के पास एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई। वारदात के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की, वहीं एफएसएल और डॉग स्क्वायड की टीम ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं।
मामला तोरवा थाना क्षेत्र स्थित आरपीएफ कॉलोनी का है। यहां रेलवे ठेकेदार के कर्मचारी नरेश कुमार गुप्ता की हत्या कर दी गई। नरेश बिहार के आरा जिले के सोनभठा गांव का रहने वाला था। वह पिछले करीब दो वर्षों से बिलासपुर में रहकर बजरंग कंस्ट्रक्शन के लिए सुपरवाइजर के तौर पर काम कर रहा था। बताया गया है कि वह चौकीदारी का काम भी करता था। ठेकेदार के मुताबिक नरेश उसके गांव का ही रहने वाला था, जिसे काम के सिलसिले में बिलासपुर लाया गया था।
हत्या की सूचना मिलते ही तोरवा पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल और डॉग स्क्वायड को भी बुलाया गया। टीम ने घटनास्थल के आसपास बारीकी से जांच करते हुए संभावित साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अब इन साक्ष्यों को जांच की कड़ियों से जोड़ने में लगी है।
जांच में घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरे भी पुलिस के लिए अहम सुराग साबित हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि CCTV फुटेज में कुछ संदिग्ध नजर आए हैं। इनकी उम्र करीब 25 से 30 साल के बीच बताई जा रही है। पुलिस अब फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान करने के साथ-साथ उनकी गतिविधियों और आने-जाने के रास्तों का पता लगाने में जुटी है।
नरेश की हत्या के पीछे आखिर वजह क्या थी, यह फिलहाल सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। पुलिस चोरी की नीयत से हत्या किए जाने की आशंका के साथ-साथ आपसी रंजिश और व्यक्तिगत विवाद के एंगल से भी जांच कर रही है। नरेश किन लोगों के संपर्क में था, उसकी किसी से कोई दुश्मनी या विवाद तो नहीं था और वारदात से पहले उसकी गतिविधियां कैसी थीं, इन सभी बिंदुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।
सबसे गंभीर सवाल अब रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खड़ा हो गया है। आरपीएफ कॉलोनी रेलवे स्टेशन से बिल्कुल लगी हुई है। आसपास आरपीएफ, जीआरपी और स्थानीय पुलिस की निगरानी रहती है। इसके बावजूद इसी संवेदनशील इलाके में हत्या जैसी वारदात का होना सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है।
आखिर स्टेशन से सटे इलाके में अपराधी कितनी आसानी से पहुंच गए? वारदात के बाद वे किस रास्ते से फरार हुए? क्या रात के समय इलाके में पर्याप्त पुलिस गश्त थी? क्या CCTV कैमरों की निगरानी नियमित रूप से की जाती है? ऐसे कई सवाल अब सामने आ रहे हैं।
फिलहाल पुलिस CCTV फुटेज, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और अन्य तकनीकी सुरागों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। हत्या की असली वजह और वारदात को अंजाम देने वाले आरोपियों का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
लेकिन आरपीएफ कॉलोनी जैसे संवेदनशील इलाके में हुई इस हत्या ने रेलवे स्टेशन के आसपास की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और आरपीएफ-जीआरपी व स्थानीय पुलिस के बीच समन्वय को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि पुलिस CCTV में नजर आए संदिग्धों तक कितनी जल्दी पहुंचती है और नरेश की हत्या के पीछे छिपी पूरी कहानी कब सामने आती है।


