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मुंगेली में खूनी सड़क ने ली तीन जिंदगियां, पूर्व मंत्री पुन्नूलाल मोहले के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़; जर्जर सड़क पर फिर उठे सवाल…

बिलासपुर/मुंगेली/दसरंगपुर। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में गुरुवार की सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। पूर्व खाद्य मंत्री एवं मुंगेली विधायक पुन्नूलाल मोहले के परिजन अधीन मोहले सहित तीन लोगों की मौत से इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। सुबह की सैर पर निकले तीन लोगों को एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन ने अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना गंभीर था कि तीनों घायलों को जिला अस्पताल मुंगेली ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस हादसे ने एक बार फिर बिलासपुर से तखतपुर होते हुए मुंगेली तक जाने वाले सड़क मार्ग की बदहाली और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि आखिर जर्जर सड़कों और दुर्घटनाओं की आशंकाओं के बीच आम नागरिकों की जिंदगी की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना सुबह करीब 6:30 बजे की है। अधीन मोहले अपने दो साथियों बल्लू बघेल और गंगा राम के साथ मॉर्निंग वॉक के लिए मुख्य मार्ग पर निकले थे। इसी दौरान मुंगेली की ओर जा रहे एक पिकअप वाहन ने तीनों को टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

जरहागांव थाना प्रभारी के अनुसार, हादसे में अधीन मोहले, बल्लू बघेल और गंगा राम की मृत्यु हुई है। पुलिस मामले की विवेचना में जुटी हुई है। घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है और सीसीटीवी कैमरों की मदद से हादसे की परिस्थितियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

सड़क हादसे में जान गंवाने वाले तीनों लोगों की मौत ने उनके परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अधीन मोहले, मुंगेली विधायक पुन्नूलाल मोहले के परिवार से जुड़े थे। सुबह की सामान्य दिनचर्या के तहत घर से निकले लोगों का वापस न लौटना इस हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर है।

सड़क पर निकले नागरिकों की सुरक्षा यदि सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, तो यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर आत्ममंथन का विषय भी है। हालांकि हादसे की वास्तविक परिस्थितियां पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होंगी।

बिलासपुर से तखतपुर होते हुए मुंगेली तक के सड़क मार्ग की खराब स्थिति को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतों और नाराजगी की बात सामने आती रही है। सड़क की बदहाली, यातायात का दबाव और सुरक्षा संबंधी कमियां वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वालों के लिए भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सड़क की मरम्मत, सुरक्षित आवागमन और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए जिम्मेदार विभाग आखिर कब गंभीर कदम उठाएंगे? क्या कार्रवाई किसी बड़े हादसे के बाद ही होगी? क्या सड़क की स्थिति का समय रहते आकलन कर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जा सकते?

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फिलहाल इस हादसे का कारण केवल सड़क की खराब स्थिति को नहीं माना जा सकता। दुर्घटना में पिकअप वाहन की भूमिका और अन्य परिस्थितियों की जांच पुलिस कर रही है। लेकिन इस घटना ने सड़क सुरक्षा और जर्जर मार्गों की समस्या पर ध्यान देने की जरूरत जरूर बढ़ा दी है।

हादसे के बाद पुलिस मामले की विवेचना कर रही है। सीसीटीवी फुटेज सहित उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटना की परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है। पिकअप वाहन की गति, चालक की भूमिका और दुर्घटना के अन्य पहलुओं की जांच के बाद ही हादसे की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।

तीन लोगों की मौत से उठे इस दर्दनाक सवाल का जवाब केवल पुलिस जांच तक सीमित नहीं होना चाहिए। जांच के साथ-साथ संबंधित सड़क की स्थिति, संकेतकों, सुरक्षित पैदल आवागमन और दुर्घटना संभावित स्थानों की समीक्षा भी जरूरी है।

तीन जिंदगियां चली गईं, तीन परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अब जरूरत है कि इस हादसे से सबक लेकर सड़क सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि किसी और परिवार को सुबह घर से निकले अपने प्रियजन की वापसी का इंतजार मातम में न बदलते देखना पड़े।

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