
जारी नोटिस में साफ कहा गया है कि संबंधित पटवारी तत्काल अपने मुख्यालय में उपस्थित होकर कार्यभार संभालें और उसी दिन संबंधित तहसीलदार के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से लिखित स्पष्टीकरण भी प्रस्तुत करें। निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं होने और जवाब नहीं देने की स्थिति में प्रशासन ने एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी दी है। यानी अब हड़ताल जारी रखने वाले पटवारियों के सामने विभागीय कार्रवाई का खतरा भी खड़ा हो गया है।
प्रशासन की नाराजगी की बड़ी वजह 13 अक्टूबर से बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति अथवा स्वीकृत अवकाश के ड्यूटी से अनुपस्थित रहना बताया गया है। अधिकारियों के मुताबिक पटवारियों की गैरमौजूदगी से डिजिटल क्रॉप सर्वे, फिजिकल वेरिफिकेशन, एग्रीस्टैक और आगामी धान खरीदी से जुड़े कृषक अभिलेखों के सत्यापन जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा आय, जाति और निवास प्रमाणपत्रों के लिए जांच प्रतिवेदन, नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का निराकरण भी प्रभावित हो रहा है।
सबसे गंभीर स्थिति किसानों से जुड़े फसल क्षति सर्वेक्षण को लेकर सामने आ रही है। चक्रवाती तूफान के प्रभाव से विभिन्न क्षेत्रों में हुई फसल क्षति का त्वरित सर्वेक्षण कर नुकसान का आकलन करना और पात्र किसानों को नियमानुसार राहत दिलाने की प्रक्रिया प्रशासन की प्राथमिकता में है। लेकिन पटवारियों की अनुपस्थिति के चलते जमीनी स्तर पर होने वाले सर्वेक्षण और जरूरी राजस्व कार्रवाई प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में प्राकृतिक आपदा से पहले ही परेशान किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
नोटिस में प्रशासन ने केवल काम पर लौटने का निर्देश ही नहीं दिया है, बल्कि अनुपस्थिति के परिणामों को लेकर भी कड़ा रुख दिखाया है। पटवारियों से अनधिकृत अनुपस्थिति के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई, अनुपस्थिति अवधि के वेतन एवं अन्य सेवा लाभों पर नियमानुसार कार्रवाई तथा इस अवधि को सेवा में व्यवधान यानी ‘ब्रेक इन सर्विस’ माने जाने के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
प्रशासन की इस कार्रवाई को हड़ताल के खिलाफ अब तक का सख्त कदम माना जा रहा है। एक तरफ पटवारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि शासकीय कार्यों को अनिश्चितकाल तक प्रभावित होने नहीं दिया जा सकता। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 259 पटवारी प्रशासन के अल्टीमेटम के बाद काम पर लौटते हैं या आंदोलन जारी रखते हैं।
फिलहाल इस टकराव के बीच सबसे बड़ा सवाल उन किसानों और आम नागरिकों का है, जिनके जरूरी काम पटवारियों की अनुपस्थिति के कारण अटके हुए हैं। प्रशासनिक सख्ती के बावजूद यदि गतिरोध लंबा खिंचता है तो इसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ सकता है।


