बिलासपुर

बिलासपुर रेलवे स्टेशन: धरोहर संरक्षण की चुनौती, जिसका इतिहास सुरक्षित नहीं, उसका भविष्य भी सुरक्षित नही”, बिलासपुर प्रेस क्लब की अगुवाई में हुई सर्वदलीय बैठक…

Bilaspur Railway Station: Challenge of heritage conservation, whose history is not safe, its future is also not safe", all party meeting was held under the leadership of Bilaspur Press Club...

बिलासपुर रेलवे स्टेशन की 134 साल पुरानी इमारत एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है, जो न केवल बिलासपुर शहर की पहचान है, बल्कि ब्रिटिश स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी है। समय के साथ, यह इमारत न केवल रेलवे सेवाओं का केंद्र रही है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी स्थापित हो चुकी है। परंतु, वर्तमान में गति शक्ति परियोजना के तहत इस ऐतिहासिक इमारत को तोड़ने की योजना बनाई जा रही है, जिससे इसका अस्तित्व संकट में है। इसी संदर्भ में बिलासपुर प्रेस क्लब की अगुवाई में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न जनप्रतिनिधियों और शहर के प्रमुख व्यक्तियों ने भाग लिया।

इस बैठक में इमारत को बचाने के लिए विभिन्न सुझावों और विचारों का आदान-प्रदान हुआ। वकील सुदीप श्रीवास्तव ने बताया कि स्टेशन की नई विकास योजनाओं में थोड़ा सा संशोधन करके पुरानी इमारत को संरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने इस भवन को ब्रिटिशकालीन स्थापत्य कला का अनमोल धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण की वकालत की। यह भवन एक ऐतिहासिक धरोहर है जिसे अन्यथा खो देना भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक गंभीर नुकसान होगा।

वरिष्ठ नागरिक द्वारिका प्रसाद अग्रवाल और अन्य वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि इससे पहले भी रेलवे ने देश के कई ऐतिहासिक स्टेशनों को संरक्षित किया है, इसलिए बिलासपुर स्टेशन के साथ भी ऐसा ही किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी शहर की ऐतिहासिक धरोहर उसकी पहचान होती है और उसे सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही, यह तर्क दिया गया कि नई योजनाओं को लागू करते हुए पुरानी इमारत को बिना नुकसान पहुंचाए विकास संभव है।

बैठक में यह भी चर्चा की गई कि रेलवे प्रशासन का अड़ियल रवैया इस पुरानी इमारत के संरक्षण में सबसे बड़ी बाधा है। लेकिन, इस चुनौती का सामना करने के लिए शहर के जनप्रतिनिधियों को संगठित होकर सामूहिक प्रयास करने होंगे। शिवा मिश्रा ने कहा कि हवाई अड्डों की तरह रेलवे स्टेशन को आधुनिक बनाया जा सकता है, परंतु इसके लिए पुरानी इमारत को हटाने की आवश्यकता नहीं है। इस प्रकार का दृष्टिकोण विकास और धरोहर दोनों के संतुलन को बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि पहले रेलवे जोन के जीएम से मिलकर वस्तुस्थिति की जानकारी ली जाएगी और भवन तोड़ने की योजना का विरोध दर्ज कराया जाएगा। साथ ही, इस मुद्दे को राजनीतिक स्तर पर भी उठाया जाएगा, ताकि इसे व्यापक समर्थन मिल सके। यह बैठक एक संकेत है कि शहर की धरोहर को बचाने के लिए न केवल स्थानीय लोग बल्कि सभी दल और नागरिक एकजुट होकर प्रयास कर सकते हैं।

इस पूरी पहल से यह स्पष्ट है कि “जिसका इतिहास सुरक्षित नहीं, उसका भविष्य भी सुरक्षित नहीं” जैसी बातें केवल कहावत नहीं हैं, बल्कि समाज के लिए एक आवश्यक सच्चाई हैं। इतिहास और धरोहरों का संरक्षण न केवल अतीत के प्रति सम्मान है, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ियों को उनके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मूल्यों से जोड़ने का एक माध्यम भी है।

बिलासपुर रेलवे स्टेशन की पुरानी इमारत केवल एक इमारत नहीं है, यह एक प्रतीक है – शहर के इतिहास, उसकी पहचान, और उसकी सांस्कृतिक विरासत का। इसे संरक्षित करने की लड़ाई न केवल बिलासपुर की धरोहर के लिए है, बल्कि उन तमाम धरोहरों के लिए एक उदाहरण हो सकती है जो विकास की आड़ में खतरे में हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रेस क्लब अध्यक्ष इरशाद अली व आभार प्रदर्शन कोषाध्यक्ष प्रतीक वासनिक ने किया। इस मौके पर प्रेस क्लब सचिव दिलीप यादव, सहसचिव दिलीप जगवानी, सदस्य गोपीनाथ डे, पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश बाजपेई, देवेंद्र सिंह उर्फ़ बाटू, बिभास दास, शुभाशीष बंजारे, संदीप बाजपेई, अनिल शुक्ला, शैलेंद्र गोवर्धन, अखलाख खान, लोकेश वाघमारे, पंकज गुप्ते, जेपी अग्रवाल, कमलेश शर्मा, रवि शुक्ला, राजेश दुआ, कुंजबिहारी सोनथलिया, हबीब मेमन, अमित तिवारी, एसपी पटनवार, जितेंद्र थवाईत, रविंद्र विश्वकर्मा, भूपेंद्र नवरंग, सतीश साहू, मोहन सिंह ठाकुर, घनश्याम गंधर्व, प्रकाश राव, अखिल वर्मा, सतीश नारायण मिश्रा, विनोद सिंह ठाकुर, शिव तिवारी, संजीव सिंह, उमेश सिंह ठाकुर, विशाल झा, कन्हैया कौशिक, मो नासिर, विजय क्रांति तिवारी सहित अन्य मौजूद रहे।

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