छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान जनहित याचिका: स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही का मामला…

Suo motu PIL by Chhattisgarh High Court: A case of negligence in health services...

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, ने स्वतः संज्ञान जनहित याचिका दर्ज की है, जिसमें राज्य के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में लापरवाही की गंभीरता को उजागर किया गया है। यह मामला हरिभूमि समाचार पत्र में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया है, जिसमें एक दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के इलाज में हुई लापरवाही की ओर ध्यान दिलाया गया था।

समाचार के अनुसार, एक दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया, लेकिन उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई। पीड़ित के पिता द्वारा उसे अस्पताल पहुंचाने के बावजूद कोई डॉक्टर तुरंत उपलब्ध नहीं था। हालत बिगड़ने पर उसे CIMS (छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) में रेफर किया गया, लेकिन प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा की कमी के कारण उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया। इस रिपोर्ट ने राज्य की चिकित्सा सुविधाओं में गंभीर खामियों को उजागर किया, जिसके परिणामस्वरूप उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले को जनहित याचिका में बदल दिया।

इस मामले में सुनवाई 01 अक्टूबर 2024 को हुई, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से विद्वान महाधिवक्ता प्रफुल एन भारत और उप महाधिवक्ता शशांक ठाकुर उपस्थित हुए। महाधिवक्ता ने न्यायालय से अनुरोध किया कि उन्हें आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए कुछ समय दिया जाए। न्यायालय ने इस अनुरोध को स्वीकार कर मामले की अगली सुनवाई के लिए 04 अक्टूबर 2024 की तारीख तय की है।

यह मामला छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य ढांचे में सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करता है। मरीज को सही समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने की वजह से उसकी स्थिति गंभीर हो गई, और इस तरह की घटनाएं न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाती हैं बल्कि सरकारी संस्थानों की जिम्मेदारियों पर भी ध्यान खींचती हैं।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का यह कदम स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह देखने योग्य होगा कि राज्य सरकार इस पर क्या जवाबी कार्रवाई करती है और उच्च न्यायालय द्वारा मामले की सुनवाई में क्या निष्कर्ष निकलते हैं।

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