बिलासपुर, 4 जनवरी।
बिलासपुर जिले के बिल्हा ब्लॉक के ग्राम केशला स्थित मेसर्स शंकर राइस प्रोडक्ट के संचालक मनोज अग्रवाल द्वारा कस्टम मिलिंग के लिए मिले धान को निजी व्यापारी को बेचने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना को राजस्व विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान पकड़ा। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अवनीश शरण के निर्देश पर खाद्य विभाग ने राइस मिल संचालक को नोटिस जारी किया है।
खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के तहत मेसर्स शंकर राइस प्रोडक्ट को समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान की कस्टम मिलिंग का जिम्मा सौंपा गया था। इसके लिए दिनांक 16 दिसंबर 2024 को उपार्जन केंद्र सेवांर से 280 क्विंटल धान उठाने के लिए आदेश (डी.ओ.) जारी किया गया।
दिनांक 3 जनवरी 2025 को इस धान को वाहन क्रमांक सीजी 04 एलजेड 7978 के माध्यम से उठाया गया। लेकिन राजस्व विभाग द्वारा उसी दिन बरतोरी गांव में ओम ट्रेडर्स पर निरीक्षण के दौरान पाया गया कि यह धान शासकीय आदेशों का उल्लंघन कर निजी व्यापारी को बेच दिया गया था। मौके पर धान को खाली करने की प्रक्रिया चल रही थी, जबकि वाहन चालक फरार हो गया।
खाद्य नियंत्रक ने नोटिस जारी करते हुए कहा है कि यह कार्य छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश 2016 का उल्लंघन है। साथ ही, इसे आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत दंडनीय अपराध माना गया है। नोटिस में राइस मिल संचालक से दो दिनों के भीतर समक्ष में उपस्थित होकर जवाब मांगा गया है। यदि जवाब नहीं दिया गया, तो उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
संभावित कार्रवाई:
1. राइस मिल का पंजीयन रद्द किया जा सकता है।
2. आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत अभियोजन प्रारंभ किया जा सकता है।
3. मौजूदा खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए कस्टम मिलिंग कार्य से पृथक किया जा सकता है।
यह मामला शासकीय व्यवस्था में पारदर्शिता और धान वितरण प्रणाली पर सवाल उठाता है। कस्टम मिलिंग व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को उनके धान के उचित मूल्य की गारंटी देना है। लेकिन इस तरह की घटनाएं शासन की नीतियों और किसानों के हितों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।


