बिलासपुर। जमीन ठगी के संगठित मामले में बिलासपुर पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। थाना सरकंडा क्षेत्र में दर्ज अपराध क्रमांक 1238/2025, धारा 420, 467, 468, 471, 120बी, 34 भादवि के तहत फरार चल रहे आरोपी सुरेश कुमार मिश्रा (पिता जी.पी. मिश्रा, उम्र 59 वर्ष, निवासी राज किशोर नगर, सरकंडा, जिला बिलासपुर) को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
आवेदक अरुण कुमार दुबे ने पुलिस को लिखित शिकायत दी थी कि वर्ष 1999 में वह एसईसीएल जमुना कोतमा एरिया में सुरक्षा अधिकारी पद पर कार्यरत थे। इसी दौरान उन्होंने ग्राम मोपका स्थित भूमि (खसरा नंबर 404 से 3000 वर्गफुट) भूमि स्वामी रामफल कैवर्त से खरीदी थी। इस बिक्री का पंजीयन 22 मार्च 1999 को हुआ और विधिवत नामांतरण एवं डायवर्सन भी कराया गया। भूमि पर बाउंड्रीवाल का निर्माण कराकर आरोपी सुरेश मिश्रा ने कब्जा सौंप दिया था।
भूमि बाद में सावित्री देवी राठौर को बेची गई। नामांतरण के लिए आवेदन प्रस्तुत करने पर यह विवाद खड़ा हुआ। सुरेश मिश्रा और उसके साथियों ने मिलकर उप-पंजीयक कार्यालय से कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और शिकायत दर्ज करवाई कि वास्तविक खसरा नंबर 429/2 है, जबकि दुबे ने कूट रचना कर 404/4 दर्ज कराया है।
जांच में सामने आया कि सुरेश मिश्रा ने बिक्री के समय मूल प्रति में खसरा नंबर 404 दर्ज कराया, लेकिन कार्बन प्रति में 429/2 अंकित कर पंजीयन कार्यालय में जमा कर दिया। इसी दस्तावेज का सहारा लेकर तहसील कार्यालय में आपत्ति दर्ज की गई। परिणामस्वरूप एसडीओ (राजस्व) ने आवेदक दुबे के नाम से भूमि का नामांतरण विलोपित करने का आदेश पारित कर दिया। इस तरह शिकायतकर्ता को खरीदी गई जमीन से वंचित कर दिया गया।
जमीन ठगी की इस संगठित साजिश का खुलासा होने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने तत्काल कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) राजेन्द्र जायसवाल और सीएसपी निमितेश सिंह के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी सरकंडा निरीक्षक निलेश पाण्डेय के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई।
इस मामले में पहले ही आरोपी महेन्द्र सिंह ठाकुर, राजेश कुमार मिश्रा, मनोज कुमार दुबे और बनमाली मंडल को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं मुख्य आरोपी सुरेश मिश्रा लंबे समय से फरार चल रहा था। पुलिस की विशेष टीम ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया और न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।


