बिलासपुर। रविवार की शांत सुबह लाल खदान क्षेत्र उस समय मातम में बदल गई, जब नहाने गए चार मासूम बच्चों में से दो की तालाब में डूबकर दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा ग्राम पंचायत महमंद के बेलभाठा मैदान के पास स्थित तालाब में हुआ। नयापारा शिव विहार कॉलोनी के बच्चे छुट्टी का दिन बिताने के लिए नहाने पहुंचे थे, लेकिन कुछ ही पलों में उनके परिवारों की खुशियाँ मातम में बदल गईं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चारों बच्चे तालाब की पचरी के पास उथले पानी में खेल रहे थे। लेकिन आगे बढ़ते ही गहराई अचानक बढ़ गई। इसी दौरान एक बच्चे का पैर फिसल गया और वह गहरे हिस्से में जा गिरा। उसे बचाने की कोशिश में बाकी बच्चे भी आगे बढ़ गए। सभी चारों बच्चे पानी में संघर्ष करने लगे। इस संघर्ष में दो बच्चे—प्रियांशु और उदयन—किसी तरह तैरकर बाहर आने में सफल रहे, जबकि 14 वर्षीय पवन और 13 वर्षीय साईं राव गहराई में फंस गए और कुछ ही क्षणों में पानी में समा गए।

हादसे की खबर फैलते ही लोग मौके पर जुट गए। स्थानीय लोगों ने बच्चों की तलाश शुरू की, लेकिन तालाब की अधिक गहराई और फिसलन ने रेस्क्यू को मुश्किल बना दिया। सूचना मिलते ही तोरवा पुलिस भी मौके पर पहुंची और इसके बाद एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। गोताखोरों ने करीब चार घंटे तक लगातार सर्च ऑपरेशन चलाकर दोनों बच्चों के शवों को बाहर निकाला।
जब बच्चों के शव तालाब किनारे लाए गए, तो परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। शिव विहार कॉलोनी और महमंद क्षेत्र में मातम छा गया है। हर आंख नम थी और हर दिल इस हादसे से दहला हुआ।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि तालाब का एक हिस्सा बेहद गहरा है और तल असमान है, लेकिन यहां किसी तरह की चेतावनी पट्टिका या सुरक्षा संकेत नहीं लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन की ओर से चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग या गहराई दर्शाने वाले संकेत लगाए गए होते, तो इस तरह की घटना से बचा जा सकता था। लोगों ने इस हादसे को प्रशासन की लापरवाही करार देते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

तोरवा पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास के लोगों से बयान लेकर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि तालाब के कौन से हिस्से में गहराई अधिक है और क्या यहां पहले भी कोई हादसा हुआ है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि तालाब का तल अचानक नीचे धँसा हुआ है, जिससे यह हिस्सा बेहद खतरनाक हो जाता है।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर खुले जलाशयों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण और परिजन प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं, ताकि किसी और परिवार को इस तरह की पीड़ा न झेलनी पड़े।


