बिलासपुर। शहर में जमीन खरीद–फरोख्त को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसमें खरीदार मनोज सिंह ठाकुर ने लाखों रुपये का भुगतान करने के बाद भी पूरी जमीन अपने नाम न होने पर गंभीर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। पीड़ित ने शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह से मिलकर विस्तृत लिखित शिकायत दर्ज कराई और मामले में अपराध कायम करने की मांग की।
मनोज सिंह ठाकुर का आरोप है कि उन्होंने अपने भागीदार के साथ मिलकर मौजा सकरी स्थित कुल 52 डिसमिल भूमि का सौदा 55 लाख रुपये में सुकांत विश्वकर्मा (संस्थापक, टैगोर इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी एंड रिसर्च सेंटर, सकरी) के साथ किया था। नोटरी इकरारनामा के बाद मनोज ने 53 लाख 24 हजार रुपये की राशि आरटीजीएस, चेक और नगद के माध्यम से विक्रेता को दे दी। लेकिन भुगतान के बावजूद उन्हें सिर्फ 28 डिसमिल जमीन ही पावर ऑफ अटॉर्नी और पंजीयन के माध्यम से प्राप्त हुई।
मनोज का कहना है कि बार-बार आग्रह और आश्वासन के बावजूद शेष 24 डिसमिल भूमि का पंजीयन अभी तक नहीं किया गया। आरोप है कि सुकांत विश्वकर्मा लगातार बहाने बनाकर प्रक्रिया को टालते रहे और अब अधिक दाम पाने के लालच में उसी जमीन को किसी अन्य व्यक्ति को बेचने की कोशिश कर रहे हैं।
पीड़ित के अनुसार, यदि ऐसा होता है तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने अपनी शिकायत में साफ कहा कि पूरा भुगतान होने के बावजूद विक्रेता का यह रवैया धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है और इसकी तत्काल जांच आवश्यक है।
पीड़ित मनोज सिंह ठाकुर ने एसएसपी रजनेश सिंह से मुलाकात कर समूचे प्रकरण की जानकारी दी। एसएसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत सिविल लाइन थाना को जांच के निर्देश दिए हैं। पुलिस अब दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और जमीन के दावे से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी।
मनोज सिंह ठाकुर ने मांग की है कि:
- सुकांत विश्वकर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध दर्ज किया जाए
- शेष 24 डिसमिल भूमि का पंजीयन उनके पक्ष में कराया जाए
- ताकि उन्हें आगे किसी भी आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके
मनोज का कहना है कि उनका सौदा पूरी 52 डिसमिल जमीन का हुआ था।
“मैंने पूरी रकम दे दी, आधी जमीन की रजिस्ट्री भी हो चुकी है, लेकिन बाकी जमीन देने की बजाय मुझे घुमाया जा रहा है। इसी बीच जानकारी मिली कि ज्यादा पैसों के लालच में जमीन किसी और को बेचने की तैयारी की जा रही है।”
मामला अब पुलिस जांच के अधीन है, और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जमीन सौदे से जुड़ी वित्तीय एवं कानूनी स्थितियों के आधार पर आगे कौन-सी कार्रवाई होती है।


