बिलासपुर। जिले में पदभार संभालने के बाद वरिष्ठ पुलिस कप्तान (SSP) रजनेश सिंह ने पुलिसिंग के क्षेत्र में एक नई सोच और नई दिशा स्थापित की है। उनके नेतृत्व में बिलासपुर पुलिस सिर्फ अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं रही, बल्कि जन-जागरूकता, सामाजिक सहभागिता और मानवीय मूल्यों को केंद्र में रखकर कई उल्लेखनीय अभियान चलाए जा रहे हैं। इन प्रयासों ने पुलिस और जनता के बीच भरोसे की एक नई कड़ी बनाई है।
अपराध मुक्ति से जागरूकता तक—
SSP रजनेश सिंह के निर्देश पर अपराध नियंत्रण और जनसुरक्षा से जुड़े अभियानों का विस्तार शहरी क्षेत्रों से आगे बढ़कर दूरस्थ ग्रामीण इलाकों तक हो गया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अर्चना झा और SDOP कोटा अनुभाग नुपुर उपाध्याय की सक्रिय भूमिका में इन अभियानों को सामुदायिक पुलिसिंग से जोड़कर गति दी गई।
इसी कड़ी में, पुलिस चौकी जुनापारा के तहत 15 से 20 ग्रामों में एक विशाल नशा मुक्ति रैली आयोजित की गई, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया। इसके साथ-साथ साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान भी चलाया गया, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते ऑनलाइन अपराधों से लोगों को बचाया जा सके।
हर ग्राम से 300 से 500 लोगों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण जनता पुलिस की इस मुहिम को गंभीरता से स्वीकार कर रही है। पंचायत प्रतिनिधियों को इन कार्यक्रमों में शामिल करना, जागरूकता की इस श्रृंखला को और अधिक प्रभावी बनाता है।
खेल, सद्भाव और शिक्षा—
जुनापारा, भीमापुरी, पाली सहित आसपास के स्कूलों में पुलिस अधिकारियों ने बच्चों के बीच जागरूकता अभियान चलाए।
- बच्चों को अपराध से बचाव और सोशल मीडिया सुरक्षा के गुर समझाए गए।
- खेलकूद का आयोजन कर बच्चों को प्रोत्साहित किया गया।
- दौड़ प्रतियोगिताओं के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, अनुशासन और स्वस्थ समाज का संदेश दिया गया।
इन कार्यक्रमों ने पुलिस की छवि को एक सुरक्षा बल से आगे बढ़ाकर एक संवेदनशील, सहयोगी और प्रेरक संस्था के रूप में स्थापित किया।
ठंड में गर्माहट—
ग्राम अधरिया, कोतमूड़ा और राहेरपुर के भिक्षुक पहाड़ी क्षेत्रों में तड़के सुबह पुलिसकर्मियों द्वारा गरीबों और बच्चों को गर्म कपड़े, शॉल, कंबल और बच्चों के लिए ऊनी वस्त्र वितरित किए गए।
यह पहल पुलिस की मानवीय संवेदनशीलता का ऐसा उदाहरण बन गई, जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है।
पुलिसिंग का नया मॉडल—
ग्रामीण इलाकों में पुलिस की इन लगातार की जा रही मानवीय और जागरूकता-आधारित गतिविधियों की व्यापक प्रशंसा हो रही है। वरिष्ठ पुलिस कप्तान के नेतृत्व में राजपत्रित अधिकारियों और थाना-चौकी स्तर के कर्मचारियों द्वारा मौजूदगी और जनता से सीधा संवाद, पुलिस के प्रति विश्वास को मजबूत कर रहा है।
इन पहलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि—
“पुलिस सिर्फ कानून का रक्षक नहीं, बल्कि समाज का संवेदनशील सहयोगी भी है।”
बिलासपुर पुलिस का यह मानवीय और अभिनव चेहरा आने वाले समय में जिले के लिए एक आदर्श मॉडल साबित हो सकता है।


