बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के कसडोल थाना क्षेत्र स्थित ग्राम खरवे में पिछले तीन महीनों के दौरान हुई 8 संदिग्ध मौतों ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। ग्रामीणों द्वारा कथित जहरीली शराब से मौत होने की शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है। मौतों की असली वजह जानने के लिए कब्रों में दफन शवों को निकालकर दोबारा पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब ग्रामीणों ने लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि गांव में लंबे समय से अवैध कच्ची शराब का कारोबार चल रहा था और शराब पीने वाले कई लोगों की एक-एक कर मौत हो गई। शिकायत के बाद पुलिस, प्रशासन और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की संयुक्त टीम सक्रिय हो गई है।
शनिवार को सबसे पहले मृतक महत्तरू साहू के शव का उत्खनन कर उसे पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए रायपुर भेजा गया था। इसके बाद सोमवार को प्रशासन की मौजूदगी में शेष छह शवों को भी कब्र से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई। अधिकारियों का मानना है कि फॉरेंसिक जांच की रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौतें जहरीली शराब के कारण हुई थीं या किसी अन्य वजह से।
ग्रामीणों ने गांव के ही निवासी रामसाय जायसवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि वह लंबे समय से अवैध शराब बेच रहा था और जिन लोगों ने उसके पास से शराब खरीदी और सेवन किया, उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। हालांकि प्रशासन ने अभी किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने से इनकार किया है और जांच पूरी होने तक निष्कर्ष निकालने से बचने की बात कही है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गांव में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। शव उत्खनन की कार्रवाई के दौरान एसडीपीओ कौशल किशोर वासनिक, तहसीलदार विवेक पटेल, फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम और बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। गांव में लोगों की भारी भीड़ जुटी रही और पूरे घटनाक्रम को लेकर उत्सुकता के साथ-साथ चिंता का माहौल भी दिखाई दिया।
जिन लोगों की मौत हुई है उनमें चैतू साहू, पूर्व सरपंच छातूराम साहू, विनोद साहू, बद्री पटेल, जगानंद माछी, बुटालू साहू, महत्तरू साहू और बुधराम जायसवाल शामिल हैं। इनमें से बुधराम जायसवाल का अंतिम संस्कार कर दिया गया था, इसलिए उनके शव का दोबारा परीक्षण संभव नहीं हो सकेगा।
यह मामला केवल आठ मौतों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में फैल रहे अवैध शराब के कारोबार और उसकी निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यदि जांच में जहरीली शराब से मौत की पुष्टि होती है, तो यह प्रदेश के हालिया वर्षों के सबसे गंभीर शराब कांडों में से एक साबित हो सकता है।
फिलहाल पूरे मामले की निगाहें फॉरेंसिक और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं। प्रशासन का कहना है कि वैज्ञानिक जांच पूरी होने के बाद ही मौतों के वास्तविक कारणों का खुलासा किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


