Homeबिलासपुरबिलासपुर के पटवारियों का बड़ा अल्टीमेटम: कभी भी हो सकती है हड़ताल,...

बिलासपुर के पटवारियों का बड़ा अल्टीमेटम: कभी भी हो सकती है हड़ताल, कलेक्टर को सौंपा 11 सूत्रीय मांगपत्र…

बिलासपुर। जिले के राजस्व पटवारियों ने अपनी लंबित समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने मोर्चा खोल दिया है। राजस्व पटवारी संघ, शाखा बिलासपुर ने कलेक्टर को 11 सूत्रीय मांगपत्र सौंपते हुए साफ संकेत दिया है कि यदि पदोन्नति और समयमान वेतनमान सहित अन्य प्रमुख मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ तो जिले के पटवारी बिना किसी पूर्व सूचना के कभी भी हड़ताल पर जा सकते हैं। संघ का यह निर्णय 18 जुलाई 2026 को संघ भवन, मंगला में आयोजित जिला स्तरीय बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।

संघ ने मांगपत्र में स्पष्ट किया है कि वर्तमान समय में खेतों में खरीफ फसल की बुआई पूरी हो चुकी है और लगातार हो रही बारिश के कारण नक्शा बंटांकन का कार्य मौके पर जाकर करना संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में फसल कटाई के बाद ही यह कार्य कराया जाना व्यावहारिक होगा।

एग्रीस्टैक के Unclaimed Bucket कार्य को लेकर भी पटवारियों ने गंभीर कठिनाइयों का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि संयुक्त खातेदारों की मृत्यु, पलायन, पारिवारिक विवाद, गंभीर बीमारी जैसी परिस्थितियों के कारण निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा करना संभव नहीं है। इसलिए अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए।

डीसीएस सर्वेयरों के लंबित मानदेय को लेकर भी पटवारियों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सर्वेयरों के भुगतान और दस्तावेजों का पूरा काम तहसील कार्यालय से संचालित किया जाए ताकि पटवारियों पर अनावश्यक दबाव न बने।

स्वामित्व योजना को लेकर भी संघ ने प्रशासन को आगाह किया है। पटवारियों का कहना है कि योजना में उपयोग हो रहे सॉफ्टवेयर का संचालन तकनीकी कार्य है, जिसे सामान्य पटवारी से कराना व्यवहारिक नहीं है। साथ ही नक्शे जमा कराने के लिए बार-बार रायपुर भेजे जाने से आर्थिक और मानसिक परेशानी हो रही है। उन्होंने सभी अभिलेख तहसील स्तर पर ही जमा कराने की व्यवस्था की मांग की है।

शासकीय भूमि और विस्तार पत्रक संबंधी जानकारी में भी पटवारियों ने स्पष्ट किया कि वे केवल उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर जानकारी दे सकते हैं। जिन दस्तावेजों का रिकॉर्ड उनके पास नहीं है, उनकी जांच संबंधित अधिकारी स्वयं करें।

माइलस्टोन योजना में आधार और मोबाइल नंबर जुटाने में भी बड़ी दिक्कत सामने आने की बात कही गई है। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के कारण किसान अपनी जानकारी देने से बच रहे हैं। संघ ने सुझाव दिया है कि पंजीयन के समय ही आधार और मोबाइल नंबर अनिवार्य किए जाएं तथा भुइयां पोर्टल में किसानों को स्वयं जानकारी अपडेट करने का विकल्प मिले।

राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया पर भी पटवारियों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि न्यायालयों से जारी प्रतिवेदन और ज्ञापन सीधे पक्षकारों तक पहुंच जाने से वे तत्काल रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाते हैं, जिससे अन्य सरकारी कार्य प्रभावित होते हैं। इसलिए सभी आदेश विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत ही पटवारियों तक पहुंचाए जाएं।

संघ ने “पटवारी रिकॉर्ड” शब्द के प्रयोग पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता या किसी भी वैधानिक राजस्व अभिलेख में ऐसा कोई शब्द मौजूद नहीं है, इसलिए इसका उपयोग बंद किया जाए।

डिजिटल हस्ताक्षर और ऑनलाइन राजस्व अभिलेखों में संशोधन को लेकर भी संघ ने जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जिस विभाग का अधिकारी संबंधित प्रविष्टि करता है, उसी का डिजिटल हस्ताक्षर अंतिम रूप से मान्य हो, ताकि जवाबदेही भी उसी की तय हो। साथ ही डिजिटल सिग्नेचर टोकन के नवीनीकरण के लिए जिले में अधिकृत चॉइस सेंटर निर्धारित किए जाएं।

अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण मांग कार्यभार को लेकर उठाई गई है। पटवारियों का कहना है कि न्यायालयीन कार्य, फील्ड ड्यूटी और विभिन्न सरकारी योजनाओं के कारण उन पर अत्यधिक कार्यभार है। बिना प्राथमिकता तय किए लगातार नए कार्य दिए जा रहे हैं, जिससे मानसिक और शारीरिक तनाव बढ़ रहा है तथा कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

राजस्व पटवारी संघ ने कलेक्टर से सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र समाधान की मांग की है। वहीं पदोन्नति और समयमान वेतनमान के मुद्दे पर बिना पूर्व सूचना हड़ताल की चेतावनी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। यदि मांगों का समय रहते निराकरण नहीं हुआ तो जिले की राजस्व व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

spot_img

advertisement

spot_img
RELATED ARTICLES

Recent posts