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क्या बिना मान्यता चल रही थीं कक्षाएं? बिरला ओपन माइंड स्कूल पर DEO ने दिए जांच के आदेश, शिक्षा व्यवस्था में मचा हड़कंप…

बिलासपुर। शहर के प्रतिष्ठित निजी शिक्षण संस्थान बिरला ओपन माइंड इंटरनेशनल स्कूल, व्यापार विहार एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला फीस या किताबों का नहीं, बल्कि सीधे CBSE संबद्धता, शासकीय मान्यता और शिक्षा नियमों के पालन से जुड़ा है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) बिलासपुर ने स्कूल के खिलाफ प्राप्त शिकायतों को गंभीर मानते हुए दो सदस्यीय जांच दल गठित कर सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इस आदेश के बाद शिक्षा जगत के साथ-साथ हजारों अभिभावकों में भी चर्चा तेज हो गई है।

22 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार स्कूल पर आरोप है कि उसने CBSE संबद्धता को लेकर भ्रामक जानकारी प्रदर्शित की, बिना आवश्यक वैध मान्यता के कक्षाओं का संचालन किया तथा अन्य प्रशासनिक अनियमितताएं कीं। इन आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन इतना तय है कि मामला सामान्य नहीं माना जा रहा है।

जांच के लिए शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल तिफरा के प्राचार्य विश्वनाथ कश्यप और सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी मुकेश अग्रवाल को संयुक्त जांच अधिकारी बनाया गया है। दोनों अधिकारियों को स्कूल से जुड़े सभी दस्तावेजों, रिकॉर्ड और भौतिक व्यवस्थाओं की जांच कर सात दिनों में तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच का सबसे अहम बिंदु CBSE Affiliation Code 33330502 की वैधता है। जांच दल यह पता लगाएगा कि यह संबद्धता वास्तव में व्यापार विहार स्थित परिसर के लिए मान्य है या नहीं। इसके साथ ही यह भी जांच होगी कि नर्सरी से कक्षा 8 तक संचालन के लिए स्कूल के पास सक्षम प्राधिकारी से आवश्यक अनुमति और मान्यता उपलब्ध है या नहीं।

केवल कागजी रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि स्कूल भवन, सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन उपकरण, खेल मैदान और अन्य मूलभूत सुविधाओं का भी भौतिक सत्यापन किया जाएगा। स्थापना से अब तक जारी रिपोर्ट कार्ड, प्रवेश पत्र, शुल्क रसीदें, प्रचार सामग्री और वेबसाइट पर प्रदर्शित दावों की भी जांच होगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि पाठ्यपुस्तकों का चयन और शुल्क निर्धारण छत्तीसगढ़ के संबंधित शिक्षा कानूनों के अनुरूप किया गया है या नहीं। शिकायतकर्ता और स्कूल प्रबंधन दोनों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

यह पहला अवसर नहीं है जब बिलासपुर के निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हों। पिछले कुछ वर्षों में CBSE संबद्धता, फीस नियंत्रण, अनिवार्य किताबों और मान्यता को लेकर कई शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में बिरला ओपन माइंड इंटरनेशनल स्कूल के खिलाफ जांच का आदेश पूरे निजी शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

हालांकि यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। जांच रिपोर्ट ही तय करेगी कि शिकायतों में कितना दम है और स्कूल प्रबंधन ने नियमों का पालन किया है या नहीं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित प्रावधानों के तहत प्रशासनिक कार्रवाई, मान्यता संबंधी निर्णय और अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं यदि शिकायतें निराधार साबित होती हैं तो स्कूल को आरोपों से राहत मिलेगी।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि जिला शिक्षा अधिकारी के इस कदम ने यह संदेश दे दिया है कि निजी स्कूलों में CBSE संबद्धता, मान्यता और नियमों के पालन को लेकर अब किसी भी प्रकार की शिकायत को हल्के में नहीं लिया जाएगा। अब पूरे मामले पर अभिभावकों, शिक्षा विभाग और निजी स्कूल संचालकों की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।

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