Tuesday, March 10, 2026
Homeबिलासपुरमंत्री की समीक्षा समझ के परे निगम में कुप्रबंधन का स्थायी भाव...

मंत्री की समीक्षा समझ के परे निगम में कुप्रबंधन का स्थायी भाव है और आपदा प्रबंधन फेल…शैलेष

ताज़ाख़बर36गढ़:- नगर पालिक निगम के कार्यों की स्थानीय मंत्री द्वारा की गई समीक्षा के बाद कांग्रेस प्रवक्ता ने एक बार फिर मंत्री पर फेल होने के आरोप लगाए। शैलेष पांडे ने कहा कि अमर अग्रवाल के अब तक की विधायक की भुमिका में 90 प्रतिशत हिस्सा मंत्री का है। सिर्फ एक बार जब वे विधायक थे तो सरकार कांग्रेस की थी। उन्होंने बतौर मंत्री 15 वर्ष इस शहर का विकास किया है और इस पुरे कार्यकाल में उनके कामों में शहर की जनता ने कुप्रबंधन और असफलता देखी है। नगर निगम बिलासपुर के काम कुप्रबंधन का शिकार है तथा आपदा प्रबंधन पुरी तरीके से फेल है।

मंत्री महोदय को प्लान ए, प्लान बी और आपदा प्लान बनाने की आदत हो गई है। सत्ता में आते ही उन्होंने पेयजल व्यवस्था के लिए भुमिगत जल का दोहन अविवेक पुर्ण तरीके से कराया। प्लान बी उन्होने पीएचई को करोड़ो की लागत की जल आवर्धन योजना सौंपी। इस योजना का लोकापर्ण वे पिछले विधानसभा चुनाव वर्ष 2013 में प्रदेश की मुखिया से करा चुके है। आपातकालिन प्लान शहर को पेयजल खुंटाघाट डेम से मिलेगा। जल आवर्धन योजना का लोकार्पण वर्ष 2013 में हो चुके है किन्तु आज तक निगम इसे पीएचई से हैंडओवर लेने में डरता है। उसके बाद भी कल की समिक्षा बैठक में निगम को मंत्री ने 3.89 करोड़ रुपये इस असफल काम को अपने सिर रखने के लिए दिए।

यदि निगम की योजनाएं मंत्री के नेतृत्व सफल है तो कल की समिक्षा बैठक में निगम के अभियंताओ को फटकारने की क्या जरूरत है। मंत्री महोदय ने शहर के 75 प्रतिशत कार्यो के पुर्ण होने की घोषण की। शेष के लिए डेड लाइन बता दी। असल में डेड लाइन तो उनके नेतृत्व की आ गई है जो जनता ने तय कर दी है। लालखदान का ओवरब्रिज जो सात साल में नही पुरा हुआ तो अकटुबर तक कैसे बन जाएगा। अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम बहतराई का भ्रष्टाचार सब जानते है। यदि यह सुविधा पुर्ण है तो 13 करोड़ रुपये की लागत से एक अन्य स्टेडियम की क्या जरूरत है।
मंत्री महोदय को बहतराई के एस्ट्रोटर्फ (हाॅकी) के टेंडर को एक बार देखना चाहिए उसमें इसे प्रैक्टिस के लिए कहीं नही लिखा है और वे कहते है कि यह टर्फ सिर्फ प्रशिक्षण के लिए है। कोनी-रतनपुर फोरलाइन दो माह में पुरी हो जाएगी। जनता की परेशानियों से भईया को कोई सरोकार नही है। शहर की पेयजल व्यवस्था नागरिकों को पीने का पानी नही बीमारी परोसने वाली पाईप लाइन बन गई है। करोड़ो रुपये का पाईप क्रय करने के बाद भी अब शहर के भीतर 663 किमी पाईप लाइन बदली जाएगी और 561 मोटर पंप और खरीदे जाएगें। इससे यह पता चलता है कि शहर के नेतृत्व के संरक्षण में कुप्रबंधन का बोलबाला है।

शैलेष पांडे ने कहा कि माननीय मंत्री को अपना ही कहा वह वकतव्य याद करना चाहिए जब 2003 में उन्होंने एक पत्रकार वार्ता में कहा था कि (बिलासपुर शहर का आकार एक कटोरे की शक्ल का है और यहां पानी निकासी सहज नही है) जब उन्हें यह पता था तो शहर की पानी निकासी और सीवरेज के लिए उन्होंने शहर को गड्ढे में ढकेलने के पुर्व योजनाओं का उचित मुल्याकंन क्यों नही किया।

spot_img

advertisement

spot_img
RELATED ARTICLES

Recent posts

error: Content is protected !!
Latest
Verified by MonsterInsights