बिलासपुर। कोटा से एक छात्र के अचानक लापता होने का मामला आखिरकार सुखद मोड़ पर खत्म हुआ। डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय के बालक छात्रावास से गायब हुआ 20 वर्षीय छात्र रोहित कुमार को कोटा पुलिस ने नागपुर से सकुशल बरामद कर लिया। इस पूरे घटनाक्रम ने जहां पुलिस की मुस्तैदी को उजागर किया, वहीं युवाओं में बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग की लत के खतरनाक पहलू को भी सामने ला दिया।
मिली जानकारी के अनुसार, रोहित कुमार (20 वर्ष), निवासी महावीर कॉलोनी, संगम चौक, गया (बिहार), वर्तमान में डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय, कोटा में बी. फार्मेसी चतुर्थ सेमेस्टर का छात्र था और करगी रोड स्थित बालक छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रहा था। वह 6 मार्च 2026 को अचानक हॉस्टल से लापता हो गया था। काफी खोजबीन के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिलने पर 7 मार्च 2026 को थाना कोटा में गुम इंसान क्रमांक 29/2026 दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन में “तलाश अभियान” के तहत विशेष टीम गठित की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मधुलिका सिंह और एसडीओपी नुपूर उपाध्याय के मार्गदर्शन में पुलिस ने तकनीकी और पारंपरिक दोनों तरीकों से जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने रोहित के सहपाठियों और छात्रावास के अन्य छात्रों से पूछताछ की। उसके कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बैंक अकाउंट ट्रांजेक्शन और आसपास के सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया गया। इसके अलावा टीम ने दमोह, मथुरा और वृंदावन तक जाकर तलाश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
आखिरकार 25 अप्रैल 2026 को तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर रोहित के नागपुर में होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल नागपुर रवाना हुई और 26 अप्रैल को उसे सकुशल बरामद कर लिया गया।
पूछताछ में रोहित ने जो खुलासा किया, वह चिंताजनक है। उसने बताया कि वह ऑनलाइन गेमिंग की लत में फंस गया था और इस दौरान उसने कई लोगों से उधार लेकर गेम में पैसे लगाए। कर्ज बढ़ने और परिवार को सच बताने के डर से उसने हॉस्टल से भागने की योजना बनाई और बिना किसी को बताए निकल गया।
बरामदगी के बाद पुलिस ने रोहित को उसके परिजनों को सौंप दिया। इस पूरे ऑपरेशन में निरीक्षक नरेश चौहान, उप निरीक्षक गोपाल खाण्डेकर, आरक्षक धर्मेंद्र साहू, अनिल साहू, जलेश्वर साहू और सायबर सेल के आरक्षक प्रशांत राठौर की विशेष भूमिका रही।
यह मामला न केवल पुलिस की सतर्कता और तकनीकी दक्षता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि ऑनलाइन गेमिंग की लत किस तरह युवाओं को गलत राह पर ले जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अभिभावकों को अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि ऐसे मामलों को समय रहते रोका जा सके।


