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एक साल से केमिस्ट्री शिक्षक गायब, बच्चे प्यासे पढ़ने को मजबूर! स्वामी आत्मानंद स्कूल की बदहाली पर कांग्रेस ने खोला मोर्चा…

बिलासपुर। सरकार जहां स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मॉडल बताकर अपनी उपलब्धियां गिना रही है, वहीं बिलासपुर जिले के सकरी स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। यहां पिछले एक वर्ष से केमिस्ट्री शिक्षक का पद खाली होने के कारण हायर सेकेंडरी के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इतना ही नहीं, विद्यालय में स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था भी नहीं होने से विद्यार्थियों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इन गंभीर समस्याओं को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सकरी के अध्यक्ष अमित कुमार साहू ने कलेक्टर बिलासपुर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

ज्ञापन के अनुसार, स्कूल में कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को पिछले एक साल से नियमित केमिस्ट्री की पढ़ाई नहीं मिल रही है। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के भविष्य पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों के लिए केमिस्ट्री एक प्रमुख विषय है, लेकिन शिक्षक के अभाव में उनकी पढ़ाई भगवान भरोसे चल रही है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विद्यालय में छात्रों के लिए स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। गर्मी और उमस के इस मौसम में बच्चों को मूलभूत सुविधा तक उपलब्ध नहीं हो पा रही है। पालकों और जनप्रतिनिधियों ने विद्यालय का निरीक्षण कर इन अव्यवस्थाओं को देखा, जिसके बाद प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया गया।

ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अमित कुमार साहू ने कलेक्टर से मांग की है कि हायर सेकेंडरी कक्षाओं के लिए केमिस्ट्री विषय के नियमित शिक्षक की तत्काल नियुक्ति या वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, साथ ही विद्यालय में स्वच्छ पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े।

अब बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए स्वामी आत्मानंद स्कूलों में यदि शिक्षक ही नहीं होंगे और पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं होगा, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के सरकारी दावे आखिर कितने सार्थक हैं? बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों का एक साल बर्बाद होने की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? प्रशासन इस शिकायत पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है, इस पर अब विद्यार्थियों और अभिभावकों की निगाहें टिकी हैं।

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