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ब्लैकमेल गैंग के साथ चोरी का सोना खरीदने वाले भी गिरफ्तार, महिला समेत 9 आरोपियों पर कसा शिकंजा; जेवर और नगदी बरामद…

बिलासपुर। शहर के चर्चित भयादोहन (एक्सटॉर्शन) मामले में सरकंडा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नाबालिग बच्ची को डरा-धमकाकर लाखों रुपये और सैकड़ों ग्राम सोने के जेवर हड़पने वाले गिरोह की कमर तोड़ दी है। पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में अब तक एक महिला समेत कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इतना ही नहीं, अपराध से हासिल किए गए सोने के जेवर खरीदने वाले खरीददारों को भी कानून के शिकंजे में ले लिया गया है।

मामले ने पूरे शहर को इसलिए भी झकझोर दिया क्योंकि आरोपियों ने एक नाबालिग बच्ची को उसके परिवार की हत्या की धमकी देकर महीनों तक अपने कब्जे में रखा और उससे नगदी तथा सोने के जेवर हासिल किए। पुलिस ने इस मामले में भयादोहन से प्राप्त नगदी और सोने के जेवर विभिन्न आरोपियों और खरीददारों से विधिवत जब्त कर लिए हैं।

पुलिस के अनुसार प्रार्थी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि जनवरी 2025 से लेकर 1 जुलाई 2026 तक उसकी नातिन को लगातार धमकाया गया। आरोपियों ने बच्ची को यह कहकर डराया कि यदि उसने किसी को कुछ बताया तो उसके परिजनों की हत्या कर दी जाएगी। इसी भय का फायदा उठाकर उससे करीब 14.50 लाख रुपये नकद और लगभग 450 ग्राम सोने के जेवर अपने कब्जे में ले लिए गए।

शिकायत के आधार पर सरकंडा थाना में अपराध क्रमांक 1122/2026 दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल, नगर पुलिस अधीक्षक तिलेश्वर प्रसाद यादव और थाना प्रभारी निरीक्षक प्रदीप कुमार आर्य के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई।

पुलिस ने पहले चरण में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ और अन्य आरोपियों के नाम सामने आए। इसके बाद लगातार 72 घंटे तक छापेमारी कर पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों और चोरी का सोना खरीदने वालों को भी गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अपराध में प्रयुक्त रकम और सोने के जेवर बरामद किए गए हैं।

गिरफ्तार आरोपियों में प्रियम शर्मा, आकाश झा, शौर्य करोलिया, राजेश सोनी उर्फ राजू, खुशबू बुधिया सहित पहले से गिरफ्तार आयुष यादव, आदर्श शर्मा, प्रिंस साहू और आदित्य पांडे शामिल हैं। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

यह मामला केवल भयादोहन का नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि किस तरह एक नाबालिग की मानसिक कमजोरी और डर का फायदा उठाकर अपराधियों ने लंबे समय तक करोड़ों की तरह सुनियोजित तरीके से उगाही का खेल खेला। राहत की बात यह रही कि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए न केवल पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया, बल्कि अपराध से अर्जित संपत्ति भी बरामद कर ली।

अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस गिरोह का नेटवर्क कहीं अन्य मामलों से तो जुड़ा नहीं था और क्या इनके संपर्क में अन्य लोग भी शामिल थे। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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