बिलासपुर। संकट की घड़ी में जब तेज बहाव देखकर अच्छे-अच्छों के कदम ठिठक जाते हैं, तब तीन युवकों ने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में फंसे दो युवकों को बचाकर मानवता और साहस की मिसाल पेश की। मस्तूरी थाना क्षेत्र की मल्हार चौकी अंतर्गत मनाडेरा रोड पर लीलगार नदी में 20 अगस्त को मोटरसाइकिल सहित गिरे दो युवकों को मोहन लाल केवट, महेश केवट और आदित्य केवट (करण) ने अपनी सूझबूझ और हिम्मत से सकुशल बाहर निकाल लिया।
जानकारी के अनुसार जांजगीर-चांपा और मल्हार के बीच लीलगार नदी पार करते समय चकरबेड़ा निवासी गुड़ा टंडन और दुर्गेश टंडन मोटरसाइकिल सहित नदी में जा गिरे। उस समय नदी में तेज बहाव था और दोनों युवक डूबने की स्थिति में पहुंच गए थे। मौके पर मौजूद मनाडेरा निवासी 24 वर्षीय मोहन लाल केवट, उनके साथी महेश केवट तथा आदित्य केवट (करण) ने बिना समय गंवाए बचाव अभियान शुरू कर दिया।
तेज बहाव के बीच अपनी जान जोखिम में डालते हुए तीनों युवकों ने लकड़ी की मदद से नदी में फंसे दोनों युवकों तक पहुंच बनाई और उन्हें बाहर निकालने में सफलता हासिल की। समय रहते किए गए इस साहसिक प्रयास के कारण दोनों युवकों की जान बच गई।
इस पूरे घटनाक्रम में तीनों युवकों की तत्परता और साहस ने साबित कर दिया कि आपदा के समय मदद के लिए आगे आने वाला एक व्यक्ति किसी की पूरी जिंदगी बचा सकता है। नदी के तेज बहाव के बावजूद मोहन लाल केवट और उनके साथियों ने जिस तरह जोखिम उठाया, उसकी क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।
तीनों युवकों के साहसिक कार्य को पुलिस विभाग ने भी गंभीरता से लिया। एसएसपी रजनेश सिंह ने मोहन लाल केवट, महेश केवट और आदित्य केवट (करण) को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस दौरान उनके साहस, तत्परता और मानवतापूर्ण कार्य की सराहना की गई।
पुलिस विभाग का कहना है कि संकट के समय बिना किसी स्वार्थ के किसी दूसरे व्यक्ति की जान बचाने के लिए आगे आना समाज में मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करता है। ऐसे साहसिक लोगों को प्रोत्साहित करने के साथ ही उन्हें एसडीआरएफ की टीम के माध्यम से प्रशिक्षण दिलाकर ‘जल मितान’ के रूप में तैयार करने की पहल की जाएगी। साथ ही आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जाएगा, ताकि भविष्य में जलभराव और तेज बहाव जैसी परिस्थितियों में लोगों की जान बचाने के लिए प्रशिक्षित स्थानीय लोग तत्काल मदद कर सकें।
मोहन लाल केवट, महेश केवट और आदित्य केवट का यह साहसिक कदम केवल दो जिंदगियां बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को यह संदेश भी देता है कि मुसीबत के वक्त किसी की मदद के लिए उठाया गया एक साहसी कदम जिंदगी और मौत के बीच की दूरी मिटा सकता है।


