बिलासपुर/तखतपुर। तखतपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत समडील में शनिवार को एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया। स्कूल से घर लौट रहे तीन मासूम बच्चे घोंघा नदी पर बने एनीकट को पार करते समय अचानक बढ़े तेज बहाव की चपेट में आ गए और देखते ही देखते नदी में बह गए। हादसे के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी और अपने स्तर पर बच्चों की तलाश शुरू कर दी।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और एसडीआरएफ की टीम को बुलाकर बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। नदी के आसपास के इलाकों में भी तलाशी अभियान चलाया गया। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद एक बच्चे का शव बरामद हुआ, जबकि देर रात तक दो अन्य बच्चों की तलाश जारी रही। रविवार सुबह एसडीआरएफ की टीम ने दोनों के शव भी बरामद कर लिए।
पुलिस के मुताबिक समडील निवासी अनमोल जायसवाल पिता भुनेश्वर जायसवाल, सिद्धी जायसवाल पिता भुनेश्वर जायसवाल और रिद्धी जायसवाल पिता विजय जायसवाल आपस में चचेरे भाई-बहन थे। तीनों पास के गांव नवापारा स्थित डीपी विप्र स्कूल में पढ़ते थे। शनिवार को वे गांव के अन्य बच्चों के साथ स्कूल गए थे। छुट्टी होने के बाद सभी बच्चे पैदल अपने घर लौट रहे थे। घर पहुंचने के लिए उन्हें घोंघा नदी पर बने एनीकट को पार करना पड़ता था।
ग्रामीणों के अनुसार एनीकट के ऊपर से पानी का बहाव शुरुआत में ज्यादा खतरनाक नजर नहीं आ रहा था। लेकिन अचानक नदी का जलस्तर बढ़ा और तेज बहाव आ गया। इसी दौरान बच्चे पानी की चपेट में आ गए। देखते ही देखते तीनों मासूम तेज धार में बह गए।
बच्चों के नदी में बहने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण नदी किनारे पहुंच गए। हर कोई अपने स्तर पर मासूमों को खोजने में जुट गया। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने भी मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान शुरू कराया। नदी के बहाव और अंधेरा होने के बावजूद पुलिस तथा ग्रामीण काफी दूर तक बच्चों की तलाश करते रहे।
काफी देर की तलाश के बाद रिद्धी जायसवाल का शव नदी से बरामद किया गया। वहीं अनमोल और सिद्धी की तलाश रात तक जारी रही। इसके बाद रविवार सुबह एसडीआरएफ की टीम ने दोनों के शव भी बरामद कर लिए।
तीनों बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद उन्हें स्वजन को सौंप दिया गया। लेकिन इस हादसे ने एक परिवार ही नहीं, पूरे गांव को भीतर तक झकझोर दिया।
रविवार को जब एक ही घर से तीन मासूमों की अर्थियां निकलीं तो समडील गांव की आंखें नम हो गईं। जिस आंगन में बच्चों की हंसी गूंजती थी, वहां मातम पसरा था। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव का हर व्यक्ति इस दर्दनाक मंजर को देखकर स्तब्ध था।
यह हादसा एक बार फिर नदी-नालों पर बने एनीकट और पुल-पुलियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। बरसात के दिनों में अचानक बढ़ने वाला जलस्तर और तेज बहाव कब जानलेवा बन जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। ऐसे में स्कूली बच्चों के आने-जाने वाले रास्तों पर बने एनीकट की सुरक्षा, चेतावनी संकेत और वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था बेहद जरूरी है, ताकि समडील जैसी दर्दनाक घटना दोबारा किसी परिवार की खुशियां न छीन सके।


