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23 संदिग्धों बांग्लादेशियों की पहचान सत्यापन के बाद रिहाई, 19 के बाद बाकी 4 को भी होल्डिंग सेंटर से छोड़ा गया; दो के बांग्लादेश निर्वासन की प्रक्रिया जारी…

दस्तावेजों की जांच के लिए मुर्शिदाबाद के DM से हुआ था पत्राचार, ADM ने तैयार की जांच रिपोर्ट; Deportation Manual 2026 के तहत कार्रवाई का दावा, अतीक हुसैन और हृदय शर्मा के मामले में अब भी निर्वासन की प्रक्रिया

बिलासपुर। जिले के सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में रहने वाले 23 संदिग्ध व्यक्तियों को पहचान और दस्तावेजों के सत्यापन के लिए रायपुर स्थित होल्डिंग सेंटर भेजे जाने के मामले में अब एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक अपडेट सामने आया है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले से सत्यापन संबंधी जानकारी मिलने के बाद सभी 23 व्यक्तियों को अलग-अलग चरणों में होल्डिंग सेंटर से रिहा कर दिया गया है। हालांकि, इन व्यक्तियों की अपील ट्रिब्यूनल में अभी लंबित बताई गई है, वहीं अतीक हुसैन और हृदय शर्मा के विरुद्ध बांग्लादेश निर्वासन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। इस घटनाक्रम ने पहचान सत्यापन, प्रशासनिक प्रक्रिया और निर्वासन से जुड़े मामलों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रारंभिक जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में निवासरत 23 संदिग्ध व्यक्तियों को 4 सितंबर 2026 को पहचान एवं दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने तक रायपुर स्थित होल्डिंग सेंटर भेजा गया था। इसके बाद संबंधित व्यक्तियों की पहचान और दस्तावेजों की पुष्टि के लिए मुर्शिदाबाद के जिला दंडाधिकारी (DM) को पत्राचार किया गया।

DM ने ADM को सौंपी जांच की जिम्मेदारी

सत्यापन के लिए भेजे गए पत्र के बाद मुर्शिदाबाद के जिला दंडाधिकारी ने मामले की जांच के लिए अपर जिला दंडाधिकारी (ADM) को जिम्मेदारी सौंपी। ADM ने उपलब्ध जानकारी और संबंधित अभिलेखों के आधार पर जांच की प्रक्रिया पूरी कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके बाद प्राप्त जवाब के आधार पर संबंधित व्यक्तियों की रिहाई की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

प्रशासनिक जानकारी के मुताबिक, पहले चरण में 19 व्यक्तियों के संबंध में जानकारी प्राप्त होने के बाद 17 सितंबर 2026 को उन्हें होल्डिंग सेंटर से रिहा कर दिया गया। शेष चार व्यक्तियों के संबंध में मुर्शिदाबाद के DM का जवाब 7 अक्टूबर 2026 को प्राप्त हुआ। इसके बाद इन चारों व्यक्तियों को भी होल्डिंग सेंटर से छोड़ दिया गया। इस तरह सत्यापन के लिए भेजे गए सभी 23 व्यक्तियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी हो गई।

Deportation Manual 2026 के तहत कार्रवाई

इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि कार्रवाई Deportation Manual 2026 के अनुरूप निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई। पहचान और दस्तावेजों की पुष्टि के लिए संबंधित जिले के प्रशासन से जानकारी मांगी गई, जांच अधिकारी नियुक्त किया गया और रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई की गई।

हालांकि, इस मामले का एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू यह भी है कि संबंधित व्यक्तियों की अपील ट्रिब्यूनल में अभी लंबित बताई गई है। ऐसे में मामले की अंतिम कानूनी स्थिति, ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों और सक्षम प्राधिकारी के आगामी निर्णय पर भी नजर बनी रहेगी। केवल संदिग्ध होने के आधार पर किसी व्यक्ति की नागरिकता या राष्ट्रीयता को अंतिम रूप से निर्धारित नहीं माना जा सकता; इसके लिए संबंधित कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होते हैं।

दो व्यक्तियों के निर्वासन की प्रक्रिया अब भी जारी

इस पूरे घटनाक्रम में अतीक हुसैन और हृदय शर्मा के विरुद्ध बांग्लादेश निर्वासन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन बताई गई है। इसका अर्थ है कि इन दोनों के मामलों में प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। इनके संबंध में आगे क्या निर्णय लिया जाता है, यह संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा।

सत्यापन से रिहाई तक, अब कानूनी प्रक्रिया पर निगाहें

बिलासपुर के सिरगिट्टी क्षेत्र से जुड़े इस मामले में 23 व्यक्तियों को होल्डिंग सेंटर भेजने से लेकर सत्यापन के बाद रिहा करने तक की कार्रवाई कई चरणों में पूरी हुई। पहले 19 व्यक्तियों को और फिर शेष चार को रिहा किया गया। प्रशासन ने इसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत की गई कार्रवाई बताया है, लेकिन ट्रिब्यूनल में अपील लंबित रहने और दो व्यक्तियों के निर्वासन की प्रक्रिया जारी होने के कारण मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा सकता।

अब महत्वपूर्ण सवाल यह है कि लंबित अपीलों पर ट्रिब्यूनल का क्या रुख रहता है और अतीक हुसैन तथा हृदय शर्मा के मामलों में आगे कौन-सा कानूनी निर्णय सामने आता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि सत्यापन के लिए होल्डिंग सेंटर भेजे गए सभी 23 व्यक्तियों को रिहा किया जा चुका है, जबकि संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के कुछ पहलू अभी लंबित हैं।

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