लाइक-व्यूज और प्रचार की होड़ में धार्मिक-सांस्कृतिक मर्यादाओं पर सवाल, सिविल लाइन थाने में बीएनएस की धाराओं के तहत अपराध दर्ज
बिलासपुर, 8 अक्टूबर 2026। सोशल मीडिया पर लाइक, व्यूज और प्रचार हासिल करने की होड़ अब धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं को भी विवादों के घेरे में ला रही है। बिलासपुर में गरबा की वेशभूषा में सिगरेट का सेवन करते हुए और हाथ में पिस्टल जैसी वस्तु लेकर बनाया गया एक वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। मामले में थाना सिविल लाइन पुलिस ने अपराध दर्ज कर नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों के विरुद्ध पृथक से प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए बाउंड ओवर की प्रक्रिया भी की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर एक शिकायतकर्ता ने थाना सिविल लाइन में लिखित शिकायत प्रस्तुत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि एक महिला और उसके महिला-पुरुष सहयोगियों ने गरबा नृत्य की वेशभूषा में सिगरेट का सेवन करते हुए तथा पिस्टलनुमा वस्तु हाथ में लेकर वीडियो तैयार किया। बताया गया कि वीडियो का इस्तेमाल गरबा टिकट और मेकअप के प्रचार-प्रसार के लिए किया गया तथा इसे इंस्टाग्राम और फेसबुक पर प्रसारित किया गया।
शिकायतकर्ता ने इस वीडियो को भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के विपरीत बताते हुए आशंका जताई कि इस तरह की सामग्री से समाज, विशेषकर युवाओं पर गलत प्रभाव पड़ सकता है। शिकायत और उपलब्ध वीडियो के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 1390/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 196, 299 एवं 3(5) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गरबा की वेशभूषा, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ सिगरेट तथा पिस्टलनुमा वस्तु का प्रदर्शन किए जाने को लेकर अब सोशल मीडिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। आखिर प्रचार पाने की कोशिश में धार्मिक आयोजनों से जुड़ी परंपराओं को किस हद तक इस्तेमाल किया जाना चाहिए? क्या कुछ सेकंड के वीडियो और अधिक व्यूज हासिल करने की चाह में सामाजिक जिम्मेदारी को नजरअंदाज किया जा सकता है? यह मामला इन्हीं सवालों को सामने ला रहा है।
गरबा केवल नृत्य या मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से भी जुड़ा है। ऐसे में आयोजनों की वेशभूषा और प्रतीकों का इस्तेमाल व्यावसायिक प्रचार के लिए करते समय सामाजिक संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का ध्यान रखना जरूरी है। हालांकि, वीडियो में दिखाई गई गतिविधियों और वस्तु की प्रकृति के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच के तथ्यों के आधार पर ही निकाला जाएगा।
बिलासपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक आस्था, परंपराओं और सांस्कृतिक प्रतीकों का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जाना चाहिए, जिससे किसी वर्ग की भावनाएं आहत हों या कानून-व्यवस्था की स्थिति निर्मित हो। पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर लाइक, व्यूज अथवा प्रचार हासिल करने के लिए आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने और हथियारनुमा वस्तुओं का अनुचित प्रदर्शन कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने आम नागरिकों से सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक इस्तेमाल करने और आपत्तिजनक सामग्री को बिना सत्यापन आगे प्रसारित नहीं करने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली आपत्तिजनक एवं भ्रामक सामग्री पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल थाना सिविल लाइन पुलिस मामले की विवेचना कर रही है। नौ आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है। यह मामला एक बार फिर संदेश देता है कि सोशल मीडिया पर प्रचार पाने की होड़ में किसी भी गतिविधि को प्रसारित करने से पहले उसकी सामाजिक संवेदनशीलता और संभावित कानूनी परिणामों को समझना जरूरी है।


