
सरपंच उषा धीवर ने अधिवक्ता हेमंत गुप्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका (WPC No. 5458/2026) दायर कर उनके खिलाफ शुरू की गई अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया को चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने 28 अक्टूबर 2026 के निर्देश के पालन में एसडीएम पलारी को अविश्वास प्रस्ताव से संबंधित मूल अभिलेखों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को कहा था।
अदालत में जब मूल रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया तो पंचों के सत्यापन की प्रक्रिया में कई गंभीर कमियां सामने आईं। न्यायालय ने पाया कि संबंधित पंचों की पहचान याचिकाकर्ता द्वारा कराए जाने और उनके सत्यापन का समुचित विवरण रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं था। एसडीएम की ओर से पंचों का सत्यापन किए जाने की बात कही गई, लेकिन सत्यापन पत्रक पर एसडीएम के हस्ताक्षर तक दर्ज नहीं थे। ऐसे में सत्यापन की प्रमाणिकता और पूरी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए।
मामले में एक और गंभीर पहलू तब सामने आया, जब याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि अविश्वास प्रस्ताव से संबंधित आदेश पत्रक की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के लिए विधिवत आवेदन दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इस पर हाईकोर्ट ने एसडीएम से जवाब तलब किया है।
अदालत ने एसडीएम को अपने व्यक्तिगत शपथपत्र में स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को मांगे गए दस्तावेज क्यों उपलब्ध नहीं कराए गए और पंचों के सत्यापन पत्रक पर उनके हस्ताक्षर क्यों नहीं थे। एसडीएम को तीन कार्यदिवस के भीतर इन सवालों का जवाब देना होगा।
गौरतलब है कि सरपंच उषा धीवर के खिलाफ 30 अक्टूबर 2026 को अविश्वास प्रस्ताव का सम्मेलन आयोजित किया जाना था। लेकिन रिकॉर्ड में सामने आई प्रक्रियात्मक खामियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने 21 अक्टूबर 2026 के नोटिस के तहत प्रस्तावित कार्यवाही पर आगामी सुनवाई तक रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार के शासकीय अधिवक्ता अखिलेश कुमार को न्यायालय में प्रस्तुत सभी दस्तावेजों की छायाप्रतियां जमा करने का निर्देश भी दिया है।
इस मामले में हाईकोर्ट का रुख प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अविश्वास प्रस्ताव जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में पंचों का सत्यापन, दस्तावेजों का संधारण और संबंधित पक्ष को अभिलेख उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। ऐसे में सत्यापन पत्रक पर हस्ताक्षर नहीं होना और प्रमाणित दस्तावेजों के लिए आवेदन के बावजूद प्रतियां उपलब्ध नहीं कराया जाना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को निर्धारित की है। अब एसडीएम के व्यक्तिगत शपथपत्र और संबंधित अभिलेखों के आधार पर आगे की सुनवाई होगी। फिलहाल अदालत के अंतरिम आदेश से सरपंच उषा धीवर के खिलाफ प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही पर रोक लग गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पंचों के सत्यापन की प्रक्रिया में सामने आई खामियों और दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने के पीछे आखिर क्या वजह थी? एसडीएम अपने शपथपत्र में इन सवालों का क्या जवाब देते हैं, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। हालांकि, मामले में अंतिम निर्णय आना अभी बाकी है।

