
बिलासपुर। सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी भी व्यक्ति या कर्मचारी वर्ग के खिलाफ अश्लील, अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। इंस्टाग्राम पर पटवारी संवर्ग को निशाना बनाकर कथित तौर पर की गई गाली-गलौज और आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर राजस्व पटवारी संघ, जिला बिलासपुर ने कड़ा ऐतराज जताया है। संघ ने इसे केवल कुछ कर्मचारियों का अपमान नहीं, बल्कि पूरे पटवारी संवर्ग की सामाजिक प्रतिष्ठा पर हमला बताते हुए संबंधित इंस्टाग्राम आईडी के संचालक के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग उठाई है।
संघ के संज्ञान में आया है कि इंस्टाग्राम पर @abhishektiwari5700 नामक आईडी से पटवारियों के विरुद्ध अत्यंत अशोभनीय, अमर्यादित और गाली-गलौज से भरी भाषा का सार्वजनिक रूप से इस्तेमाल किया गया है। आरोप है कि टिप्पणी में ऐसे आपत्तिजनक और अश्लील शब्दों का प्रयोग किया गया, जिससे पूरे कर्मचारी संवर्ग को अपमानित करने का प्रयास हुआ है। इस घटना ने राजस्व पटवारी संघ को नाराज कर दिया है और अब मामले में प्रशासनिक एवं कानूनी हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।
सोशल मीडिया आज विचार व्यक्त करने, सवाल उठाने और व्यवस्था की आलोचना करने का सशक्त माध्यम बन चुका है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस स्वतंत्रता की आड़ में किसी पूरे कर्मचारी वर्ग को गाली देना और सार्वजनिक रूप से उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाना उचित ठहराया जा सकता है? किसी सरकारी कर्मचारी के कामकाज, कार्यप्रणाली या कथित लापरवाही की आलोचना करना नागरिक का अधिकार है, लेकिन आलोचना और अश्लील व्यक्तिगत हमले के बीच की मर्यादा खत्म होना गंभीर चिंता का विषय है।
राजस्व पटवारी संघ का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां न केवल कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित करती हैं, बल्कि समाज में एक संपूर्ण कर्मचारी संवर्ग के प्रति अपमानजनक माहौल भी तैयार करती हैं।
आईडी के पीछे कौन, डिजिटल जांच से खुलेगा राज?
संघ ने संबंधित इंस्टाग्राम आईडी के वास्तविक संचालक की पहचान उजागर करने की मांग की है। साथ ही संबंधित टिप्पणी, पोस्ट और अन्य डिजिटल गतिविधियों के साक्ष्य सुरक्षित कराने पर जोर दिया है, ताकि जांच के दौरान किसी महत्वपूर्ण तथ्य के मिटने या नष्ट होने की आशंका न रहे।
संघ की मांग है कि संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से नियमानुसार डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित करवाए जाएं और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध प्रचलित कानूनों के तहत उचित वैधानिक कार्रवाई की जाए।
अब जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि सोशल मीडिया पर कथित रूप से पूरे कर्मचारी संवर्ग को अपमानित करने वाली टिप्पणी के पीछे कौन है और उसके खिलाफ कानून के दायरे में क्या कार्रवाई होती है। राजस्व पटवारी संघ ने स्पष्ट रूप से इस मामले को गंभीरता से उठाया है। अब संबंधित अधिकारियों की जांच और आगे की कार्रवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
सोशल मीडिया पर असहमति, आलोचना और सवाल उठाने का अधिकार लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल किसी की गरिमा को कुचलने के लिए नहीं होना चाहिए। कानून की कसौटी पर यह तय होना जरूरी है कि संबंधित टिप्पणी ने किस सीमा का उल्लंघन किया है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

