Wednesday, March 11, 2026
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रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में खुलासा, 99.3 फीसदी पुराने नोट वापस आ गए, कांग्रेस ने बोला हमला

(ताज़ाख़बर36गढ़) नवंबर, 2016 में नोटबंदी लागू होने के बाद बंद किए गए 500 और 1,000 रुपये के नोटों का 99.3 प्रतिशत बैंको के पास वापस आ गया है. रिजर्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. नोटबंदी के समय मूल्य के हिसाब से 500 और 1,000 रुपये के 15.41 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन में थे. रिजर्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से 15.31 लाख करोड़ रुपये के नोट बैंकों के पास वापस आ चुके हैं. केंद्रीय बैंक ने कहा कि निर्दिष्ट बैंक नोटों (एसबीएन) की गिनती का जटिल कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंकों के पास आए एसबीएन को जटिल द्रुत गति की करेंसी सत्यापन एवं प्रसंस्करण प्रणाली (सीवीपीएस) के जरिये सत्यापित किया गया और उसके बाद उनकी गिनती करने के बाद उन्हें नष्ट कर दिया गया. एसबीएन से तात्पर्य 500 और 1,000 के बंद नोटों से है.रिजर्व बैंक ने कहा कि एसबीएन की गिनती का काम पूरा हो गया है. कुल 15,310.73 अरब मूल्य के एसबीएन बैंकों के पास वापस आए हैं.

वहीं नोटबंदी के बाद जमा हुए नोटों का आधिकारिक आंकड़ा सामने आने के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा और सवाल किया कि क्या वह ‘झूठ बोलने’ के लिए माफी मांगेगे. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘आरबीआई की रिपोर्ट से फिर साबित हो गया कि नोटबंदी व्यापक स्तर की ‘मोदी मेड डिजास्टर’ थी. चलन से बाहर हुए 99.3 फीसदी नोट वापस आ गए हैं.’

उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2017 में स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में दावा किया था कि तीन लाख करोड़ रुपये वापस आ रहे हैं. उन्होंने सवाल किया, ‘मोदी जी, क्या आप वह झूठ बोलने के लिए माफी मांगेंगे ? आरबीआई ने आज आंकड़े जारी कर बताया कि नोटबंदी के दौरान 15 लाख 41 हजार करोड़ रुपये चलन में थे. इनमें से 15 लाख 31 हजार करोड़ रुपये अब तक वापस आ चुके हैं.

गौरतलब है कि नोटबंदी पर बनी संसदीय कमेटी में शामिल बीजेपी सदस्यों ने समिति की ड्राफ्ट रिपोर्ट पर ऐतराज जताते हुए इसे मंजूर करने से रोक दिया था. कांग्रेस के वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली इस कमिटी की रिपोर्ट को आलोचनात्मक बताया जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, नोटबंदी ने देश पर व्यापक असर डाला था. इससे कैश की कमी हो गई, जिससे GDP में एक प्रतिशत की गिरावट आई और बेरोजगारी बढ़ी.

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