Homeशिक्षागुटखा खाने का शौकीन को पड़ा महंगा: बच्चों को गुटखा खरीदने भेजने...

गुटखा खाने का शौकीन को पड़ा महंगा: बच्चों को गुटखा खरीदने भेजने वाला भृत्य निलंबित, जांच बाद हुई कार्यवाई

बिलासपुर। हाल ही में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तुरी विकासखंड के कटहा मिडिल स्कूल में एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की नैतिकता पर सवाल खड़ा कर दिया। स्कूल में कार्यरत भृत्य संतोष कुमार यादव द्वारा बच्चों को स्कूल के बाहर पान ठेले से गुटखा खरीदने भेजा जा रहा था। इस घटना का वीडियो स्थानीय सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासनिक हलचल तेज हो गई और अधिकारियों ने त्वरित कार्रवाई की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अवनीश शरण ने त्वरित संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए। डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी) के निर्देश पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने मौके पर जाकर जांच की, जिसमें इस घटना को सत्य पाया गया। यह स्पष्ट हो गया कि भृत्य द्वारा बच्चों को अनुचित कार्यों के लिए स्कूल से बाहर भेजा जा रहा था, जो न केवल बच्चों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही दर्शाता है बल्कि स्कूल के अनुशासन और नैतिकता का भी उल्लंघन है।

टीएल बैठक में कलेक्टर ने इस पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने के बाद भृत्य संतोष कुमार यादव को सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत निलंबित कर दिया गया। इस कृत्य को शिक्षा व्यवस्था के नियमों और अनुशासन के खिलाफ पाया गया। निलंबन के दौरान यादव का मुख्यालय कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी मस्तुरी में रखा गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।

इस घटना ने शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों की जिम्मेदारी और नैतिकता पर सवाल खड़े किए हैं। एक स्कूल का भृत्य, जिसका काम विद्यालय की व्यवस्थाओं में सहयोग करना और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, उसने न केवल अपने कर्तव्यों का उल्लंघन किया बल्कि बच्चों को एक खतरनाक और अनुचित आदत के संपर्क में भी लाया।

गुटखा जैसी हानिकारक चीजों से बच्चों को दूर रखने की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन और कर्मचारियों की होती है। ऐसे में भृत्य द्वारा बच्चों को गुटखा खरीदने भेजना बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा और नैतिक मार्गदर्शन के लिए सभी कर्मचारियों का सजग रहना कितना महत्वपूर्ण है।

शिक्षा के क्षेत्र में ऐसी घटनाओं का सामने आना चिंताजनक है, क्योंकि ये बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकती हैं। इस मामले में प्रशासन द्वारा त्वरित और सख्त कदम उठाकर यह संदेश दिया गया है कि अनुशासनहीनता और बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ऐसी घटनाओं से शिक्षा संस्थानों को सीख लेनी चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और नैतिकता को प्राथमिकता दी जाए।

spot_img

advertisement

spot_img
RELATED ARTICLES

Recent posts