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खाद संकट से सुलगता किसान, हथियारों की आग में झुलसती दुनिया और कंक्रीट में दफन होती खेती…रघु ठाकुर का बड़ा हमला…

बिलासपुर। देश में बढ़ते खाद संकट, कृषि भूमि के तेजी से खत्म होते दायरे और वैश्विक युद्धों की राजनीति को लेकर प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर ने बिलासपुर में तीखा हमला बोला। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि किसानों के सामने खड़ा खाद संकट कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि “मुनाफाखोरों और सरकारी लापरवाही से पैदा किया गया संगठित संकट” है।

बिलासपुर प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में पत्रकारों से चर्चा करते हुए लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय संरक्षक रघु ठाकुर ने आरोप लगाया कि बाजार में यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी खादों की कृत्रिम कमी पैदा की जा रही है। सोसायटियों से खाद गायब है, खुले बाजार में किसान भटक रहे हैं और बिचौलियों का गठजोड़ जमकर कालाबाजारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि खाद की रैक आने से लेकर वितरण तक पूरी सप्लाई चेन पर व्यापारिक सिंडिकेट हावी है, जो पहले स्टॉक दबाता है और फिर किसानों को ऊंचे दामों पर खाद खरीदने को मजबूर करता है।

उन्होंने सरकार से सवाल पूछा कि आखिर हर सीजन में किसानों को खाद के लिए सड़कों पर क्यों उतरना पड़ता है? यदि उत्पादन और आपूर्ति पर्याप्त है, तो फिर गोदामों से खाद गायब कैसे हो जाती है? ठाकुर ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस खेल पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले दिनों में किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे।

रघु ठाकुर ने सिर्फ खाद संकट तक अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि वैश्विक राजनीति और युद्ध आधारित अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी ताकतें हथियार बेचने के लिए युद्धों को जिंदा रखती हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडिल ईस्ट का तनाव केवल राजनीतिक संघर्ष नहीं, बल्कि हथियार बाजार का खेल है। अरबों डॉलर के हथियार उद्योग को चलाने के लिए दुनिया को लगातार संघर्ष और अस्थिरता की आग में झोंका जा रहा है। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर तेल संकट, महंगाई और आर्थिक दबाव के रूप में पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि एक ओर किसान खाद और बिजली के संकट से जूझ रहा है, दूसरी ओर उसकी जमीन भी तेजी से छीनी जा रही है। बिलासपुर के आसपास उपजाऊ कृषि भूमि का बड़े पैमाने पर डायवर्सन हो रहा है। खेतों की जगह फार्म हाउस, रिसॉर्ट, फैक्ट्रियां और अवैध प्लॉटिंग खड़ी हो रही है। ठाकुर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि खेती की जमीन को इसी तरह कंक्रीट में बदला जाता रहा, तो भविष्य में देश को अनाज संकट का सामना करना पड़ेगा।

पर्यावरण और ऊर्जा के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि बिजली उत्पादन के नाम पर लगातार कोयला खनन हो रहा है और जंगल खत्म किए जा रहे हैं। इसका समाधान केवल सौर ऊर्जा है। उन्होंने मांग की कि सरकार हर घर को 100 प्रतिशत सोलर सब्सिडी दे ताकि लोग अपनी बिजली खुद पैदा कर सकें और कोयले पर निर्भरता कम हो।

रघु ठाकुर की यह पूरी टिप्पणी केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि देश की कृषि, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को लेकर एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आई है। सवाल अब यह है कि सरकार किसानों की पीड़ा और खाद संकट पर कार्रवाई करेगी या फिर हर सीजन की तरह किसान एक बार फिर व्यवस्था की लापरवाही का शिकार बनता रहेगा।

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