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45 डिग्री की तपिश में फूटा जनता का गुस्सा: तिफरा बिजली ऑफिस का घेराव, गेट टूटा, सड़क जाम… अघोषित कटौती पर कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन…

बिलासपुर। नवतपा के पहले ही दिन 45 डिग्री की झुलसाती गर्मी के बीच बिलासपुर में अघोषित बिजली कटौती को लेकर जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। तिफरा स्थित बिजली विभाग कार्यालय के बाहर मंगलवार को उस वक्त हालात तनावपूर्ण हो गए, जब जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के पूर्व अध्यक्ष और बेलतरा विधानसभा से पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय केशरवानी की अगुवाई में हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता और ग्रामीण प्रदर्शन करते हुए बिजली दफ्तर का घेराव करने पहुंच गए।

सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ प्रदर्शन धीरे-धीरे उग्र होता गया। बेलतरा सहित बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर, रतनपुर, सकरी, सीपत और ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने “बिजली कटौती बंद करो” के नारे लगाए। प्रदर्शनकारी अपने हाथों में कूलर, फ्रिज और बिजली संकट से जुड़े पोस्टर लेकर पहुंचे थे। भीषण गर्मी में महिलाएं, युवा और ग्रामीण खुले आसमान के नीचे घंटों डटे रहे।

स्थिति तब बिगड़ गई जब आक्रोशित कार्यकर्ता मुख्य सड़क पर बैठ गए, जिससे लंबा जाम लग गया। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारी बिजली विभाग के मुख्य गेट को तोड़कर परिसर के भीतर घुस गए। हालांकि पहले से सतर्क प्रशासन ने मुख्य अभियंता कार्यालय का गेट बंद कर भारी पुलिस बल तैनात कर रखा था। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और अफरातफरी का माहौल बन गया।

करीब दो घंटे तक कांग्रेसजन बिजली कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे रहे। चिलचिलाती धूप में जमीन पर बैठे प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिना ठोस आश्वासन वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। मौके पर पहुंचे बिजली विभाग के मुख्य अभियंता अंबष्ट, जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लिया और व्यवस्था सुधारने का भरोसा दिलाया।

इस दौरान विजय केशरवानी ने राज्य सरकार और बिजली विभाग पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि “छत्तीसगढ़ बिजली उत्पादन करने वाला राज्य है, लेकिन यहां की जनता अंधेरे में जीने को मजबूर है। जंगल काटे जा रहे हैं, बिजली बाहर बेची जा रही है और छत्तीसगढ़िया गर्मी में तड़प रहा है। यह ‘दिया तले अंधेरा’ वाली स्थिति है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली विभाग हर साल तैयारी के नाम पर करोड़ों खर्च करने का दावा करता है, लेकिन थोड़ी सी हवा-पानी में पूरा सिस्टम ठप हो जाता है। विभाग पूरी तरह ठेका व्यवस्था पर निर्भर हो चुका है, जहां न पर्याप्त कर्मचारी हैं और न ही जनता की समस्याओं के प्रति जवाबदेही।

केशरवानी ने कहा कि मई-जून के महीने में NEET, PSC और विश्वविद्यालय परीक्षाएं चल रही हैं, किसान सिंचाई के लिए परेशान हैं, छोटे दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है, लेकिन सरकार “सुशासन तिहार” के प्रचार में व्यस्त है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जब जनता को बिजली तक नहीं दे पा रहे, तो यह सुशासन नहीं, सिर्फ दिखावा है।”

उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति को शहर से भी ज्यादा भयावह बताते हुए कहा कि कई गांवों में दिनों तक बिजली गुल रहती है। मोपका फीडर से जुड़े बेलतरा विधानसभा के अधिकांश क्षेत्रों में बार-बार बिजली बंद होने की समस्या बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि शहर और ग्रामीण इलाकों के लिए अलग-अलग पेट्रोलिंग वाहन चलाए जाएं, पर्याप्त लाइनमैन और संविदा कर्मचारी नियुक्त किए जाएं, ट्रांसफार्मर और लाइन मेंटेनेंस समय पर हो तथा कॉल सेंटर में जिम्मेदार अधिकारी शिफ्टवार ड्यूटी करें।

जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने भी बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कॉल सेंटर में फोन उठाने तक की व्यवस्था नहीं है। ऑनलाइन शिकायत के नाम पर लोगों को सिर्फ इंतजार कराया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारों के कर्मचारी अधिकारियों की बात तक नहीं मानते, जिससे जनता परेशान है।

प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, ब्लॉक अध्यक्ष, महिला कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। पूरे आंदोलन के दौरान “बिजली दो या कुर्सी छोड़ो”, “अघोषित कटौती बंद करो” और “जनता त्रस्त, सरकार मस्त” जैसे नारे गूंजते रहे।

प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र किया जाएगा।

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