Friday, February 27, 2026
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बिलासपुर में सरकंडा शिवघाट पर शासकीय जमीन कब्जे का मामला: शारदा मंदिर समिति और स्थानीय लोग पहुंचे प्रेस क्लब…

बिलासपुर। सरकंडा स्थित शिवघाट के पास शासकीय जमीन पर कब्जे के मामले ने तूल पकड़ लिया है। गुरुवार को शारदा मंदिर समिति और स्थानीय निवासी बिलासपुर प्रेस क्लब पहुंचे और आरोप लगाया कि जायसवाल परिवार शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहा है।

मंदिर समिति के सदस्य नैन सिंह परिहार, राजेश्वर दुबे, राज कुमार दुबे, दिनेश दुबे, ममता सोनी, मंदाकिनी श्रीवास, सुनीता दुबे, लता दुबे, रजनी दुबे, गंगोत्री श्रीवास, रोशनी श्रीवास और प्रीति दुबे ने बताया कि शिवघाट स्थित खसरा नंबर 1105 शासकीय जमीन है, जबकि जायसवाल परिवार अपनी जमीन का खसरा नंबर 1102/12 बताकर वहां अवैध रूप से बाउंड्रीवाल बनाने का प्रयास कर रहा है।

मंदिर और घाट जाने का रास्ता होगा बंद

समिति और स्थानीय निवासियों का कहना है कि खसरा नंबर 1105 पर यदि कब्जा हो जाता है, तो इससे शारदा मंदिर और घाट जाने का आम रास्ता बंद हो जाएगा। यह मार्ग वर्षों से स्थानीय लोगों के धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए उपयोग में लाया जाता रहा है। घाट पर लोग अपने पूर्वजों के श्राद्ध कर्म, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य कार्यक्रम आयोजित करते हैं। यदि इस रास्ते को अवरुद्ध कर दिया गया तो हजारों परिवारों को असुविधा होगी और जनहित के कार्य बाधित हो जाएंगे।

विधायक ने की जांच की मांग

समिति और स्थानीय नागरिकों ने बताया कि 3 फरवरी को जब जायसवाल परिवार द्वारा शासकीय जमीन पर बाउंड्रीवाल बनाई जा रही थी, तब मंदिर समिति और मोहल्ले के लोगों ने इसका विरोध किया। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने प्रशासन से जांच की मांग की। कलेक्टर के निर्देश पर इस मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो पूरे प्रकरण की जांच करेगी।

झूठे आरोप लगाकर बचाव का प्रयास

मंदिर समिति और मोहल्लेवासियों का आरोप है कि जायसवाल परिवार अपने अवैध कृत्य को छिपाने के लिए झूठे आरोप लगा रहा है। समिति ने साफ किया कि वे केवल शासकीय जमीन पर कब्जा रोकने के लिए आवाज उठा रहे हैं और विधायक सुशांत शुक्ला से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

अब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि जमीन किसकी है और किस पक्ष का दावा सही है। स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही न्यायोचित निर्णय लेकर जनहित को प्राथमिकता देगा।

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