Tuesday, April 14, 2026
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बिलासपुर प्रेस क्लब चुनाव मामले में हाईकोर्ट का नोटिस: रद्दीकरण पर उठे सवाल, राज्य शासन समेत सभी पक्षों से दो सप्ताह में जवाब तलब…

बिलासपुर। बिलासपुर प्रेस क्लब के 19 सितंबर 2025 को हुए चुनाव को रद्द करने के मामले ने अब कानूनी रूप से तूल पकड़ लिया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस प्रकरण में दायर याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य शासन, पंजीयक फर्म एवं संस्थाएं, सहायक पंजीयक, प्रेस क्लब और शिकायतकर्ताओं को दो सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की सुनवाई नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ में हुई, जहां याचिकाकर्ता की ओर से चुनाव रद्द करने की प्रक्रिया को कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया गया।

दरअसल, 19 सितंबर 2025 को हुए चुनाव में दिलीप यादव अध्यक्ष, गोपी डे उपाध्यक्ष, संदीप करिहार सचिव, लोकेश बाघमारे कोषाध्यक्ष, रमेश राजपूत सह सचिव और कैलाश यादव कार्यकारिणी सदस्य निर्वाचित हुए थे। चुनाव परिणाम से असंतुष्ट उम्मीदवारों—अजीत मिश्रा, दिलीप अग्रवाल सहित अन्य—ने सहायक पंजीयक, फर्म एवं संस्थाएं के समक्ष शिकायत दर्ज कराई।

आरोप है कि सहायक पंजीयक ने बिना समुचित जांच के चुनाव रद्द करने की अनुशंसा कर दी, जिसके आधार पर रजिस्ट्रार, रायपुर ने 18 नवंबर 2025 को चुनाव निरस्त कर नए चुनाव कराने का आदेश जारी कर दिया। खास बात यह रही कि चुनाव रद्द करने के छह दिन बाद प्रेस क्लब पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर 15 दिनों में स्पष्टीकरण देने को कहा गया।

इस बीच तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप यादव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। याचिका लंबित रहने के बावजूद चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर भी सवाल उठे हैं।

मामले में एक अहम पहलू यह भी सामने आया कि वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अपीलीय अधिकारी ने 6 मार्च 2026 को अपने आदेश में माना कि सहायक पंजीयक द्वारा चुनाव रद्द करने की अनुशंसा विधिसम्मत नहीं थी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि छत्तीसगढ़ सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1973 की धारा 33(ग) केवल शासकीय पोषित संस्थाओं पर लागू होती है, जबकि बिलासपुर प्रेस क्लब एक निजी संस्था है, इसलिए इस पर उक्त धारा लागू नहीं होती।

इसके बावजूद अपील को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि अपीलकर्ता नए चुनाव में भाग ले चुका है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने रजिस्ट्रार और अपीलीय अधिकारी के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हेमंत गुप्ता ने दलील दी कि कानून के विरुद्ध लिया गया कोई भी निर्णय स्वतः निरस्त माना जाता है और उस पर कोई वैधानिक रोक लागू नहीं होती। याचिका में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के न्याय सिद्धांतों का भी हवाला दिया गया है।

राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता शोभित मिश्रा, जबकि प्रतिवादियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रफुल्ल एन. भारत और हर्षवर्धन अग्रवाल ने पक्ष रखा।

फिलहाल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सभी पक्षकारों को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब बेहद अहम मानी जा रही है, जिससे प्रेस क्लब की वैधता और संस्थागत चुनावों में प्रशासनिक हस्तक्षेप की सीमा तय हो सकती है।

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