Wednesday, April 29, 2026
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शिक्षा विभाग में ‘सेटिंग-सिस्टम’ का खेल: 30 लाख के भृत्य घोटाले से मचा हड़कंप, कलेक्टर का अल्टीमेटम—3 दिन में दो, नहीं तो होगी बड़ी कार्रवाई…

बिलासपुर।
जिले के शिक्षा विभाग में लंबे समय से simmer कर रहे अनियमितताओं के आरोप अब बड़े प्रशासनिक एक्शन में बदलते दिख रहे हैं। युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और कोटा विकासखंड में सामने आए करीब 30 लाख रुपये के ‘भृत्य घोटाले’ ने प्रशासन को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। कांग्रेस नेता अंकित गौरहा की दस्तावेज़ी शिकायत के बाद कलेक्टर ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए संयुक्त संचालक (जेडी) शिक्षा को तीन दिनों के भीतर अंतिम जांच रिपोर्ट पेश करने का अल्टीमेटम दे दिया है।

मामले की गंभीरता इसी से समझी जा सकती है कि कलेक्टर कार्यालय ने TL नंबर 19185/25-03-2026 के तहत स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और बाबू सुनील यादव की भूमिका पर विस्तृत प्रतिवेदन मांगा है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि बिना कलेक्टर और जिला स्तरीय समिति की अनुमति के संशोधन आदेश कैसे जारी किए गए और क्या इसमें आर्थिक लेन-देन शामिल है।

शिकायत में आरोप है कि शिक्षकों की पदस्थापना प्रक्रिया को नियमों से हटाकर मनमाने तरीके से संचालित किया गया। ‘युक्तियुक्तकरण संशोधन’ के नाम पर करीब 200 प्रकरणों में बिना सक्षम अनुमति बदलाव किए गए। कई फाइलों में न तो वैध नोटशीट है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में शिक्षकों को मौखिक आदेश देकर जॉइनिंग कराई गई, जिससे प्रक्रिया को औपचारिक जांच से बचाया जा सके।

इन आरोपों ने प्रभारी डीईओ विजय टांडे और बाबू सुनील यादव की भूमिका को कटघरे में ला खड़ा किया है। आरोप है कि प्रभाव और ‘सेटिंग’ के जरिए चहेते लोगों को लाभ पहुंचाया गया और पूरी प्रक्रिया को पर्दे के पीछे संचालित किया गया।

सूत्रों के मुताबिक, रायपुर स्थित डीपीआई में पदस्थ एक अधिकारी पर भी इस पूरे खेल को संरक्षण देने के आरोप लग रहे हैं। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि जांच को प्रभावित कर जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश की जा सकती है।

इसी बीच कोटा विकासखंड से सामने आया भृत्य घोटाला मामले को और गंभीर बना देता है। आरोप है कि एक भृत्य के खाते में ‘वर्दी धुलाई’ सहित अन्य मदों के नाम पर करीब 29.64 लाख रुपये का भुगतान किया गया। सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच हर महीने 4 लाख रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर होना सामान्य प्रक्रिया से परे माना जा रहा है।

मामले में फिलहाल संबंधित क्लर्क और भृत्य को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन मुख्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही जिला कोषालय के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है।

यह पहला मामला नहीं है जब शिक्षा विभाग में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हों। इससे पहले भी सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी राजेश कुमार प्रताप बाली पर गबन के आरोप सामने आए थे, लेकिन उस मामले में भी उच्च स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी।

कलेक्टर द्वारा जारी सख्त स्मरण-पत्र ने यह साफ कर दिया है कि अब जांच में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो शिक्षा विभाग में बड़े स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई तय मानी जा रही है।

अब निगाहें तीन दिन बाद आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो न सिर्फ इस घोटाले की सच्चाई उजागर करेगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि शिक्षा विभाग में जवाबदेही कितनी मजबूत है।

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