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क्लीन चिट के 24 घंटे बाद फिर कटघरे में बिरला ओपन माइंड स्कूल: रिपोर्ट कार्ड का CBSE कोड बना नया विवाद, जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल…

बिलासपुर। सुशासन तिहार के मंच से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू जहां शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों के सख्त पालन की बात कर रहे थे, वहीं बिलासपुर में एक निजी स्कूल से जुड़ा विवाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है। व्यापार विहार स्थित बिरला ओपन माइंड इंटरनेशनल स्कूल को जांच समिति द्वारा दी गई क्लीन चिट अब नए दस्तावेजों के सामने आने के बाद फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है।

मामले का केंद्र इस बार विद्यार्थियों को जारी किए गए प्रोग्रेस रिपोर्ट कार्ड हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि रिपोर्ट कार्ड में अंकित सीबीएसई संबद्धता कोड 33330502 मोपका स्थित विद्यालय से संबंधित है, जबकि व्यापार विहार परिसर को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से केवल नर्सरी से कक्षा पांचवीं तक संचालन की अनंतिम मान्यता प्राप्त है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर रिपोर्ट कार्ड में अंकित यह कोड किस आधार पर उपयोग किया गया?

यह वही मामला है जिसमें 29 मई 2026 को गठित जांच समिति ने विद्यालय के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अप्रमाणित बताते हुए क्लीन चिट दे दी थी। लेकिन अब शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जांच रिपोर्ट में उन दस्तावेजों और तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया, जो विद्यालय की मान्यता, संचालन और संबद्धता संबंधी दावों पर सवाल खड़े करते हैं।

विवाद केवल संबद्धता कोड तक सीमित नहीं है। शिकायतकर्ताओं ने यह मुद्दा भी उठाया है कि व्यापार विहार स्थित परिसर एक व्यावसायिक भवन में संचालित हो रहा है, जहां स्कूल की कक्षाएं ऊपरी मंजिलों पर लगाई जाती हैं। उनका कहना है कि भवन की संरचना, अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकास व्यवस्था, खेल मैदान और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्वतंत्र तकनीकी जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि परिसर स्कूल संचालन के निर्धारित मानकों को पूरा करता है या नहीं।

मोपका और व्यापार विहार परिसरों के बीच संबंधों को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि पूर्व में हुई जांचों के दौरान दोनों परिसरों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए थे। यदि दोनों संस्थान स्वतंत्र रूप से संचालित हो रहे हैं, तो फिर व्यापार विहार परिसर के विद्यार्थियों के रिपोर्ट कार्ड में मोपका से जुड़े बताए जा रहे सीबीएसई कोड का उपयोग क्यों दिखाई दे रहा है? यह सवाल अब पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील बिंदु बन गया है।

अभिभावकों के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा तेज है कि जिन मामलों में अन्य निजी विद्यालयों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई हुई, वहां शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया, लेकिन यहां दस्तावेजी प्रश्न सामने आने के बावजूद जांच रिपोर्ट ने विद्यालय को राहत दे दी। इससे विभागीय जांच की निष्पक्षता और एकरूपता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

शिकायतकर्ताओं ने विद्यालय में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें उपयोग कराने, विशेष विक्रेताओं से पुस्तकें और अध्ययन सामग्री खरीदने के लिए अभिभावकों को प्रेरित किए जाने तथा शुल्क संरचना में पारदर्शिता की कमी जैसे आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों पर विद्यालय प्रबंधन का अधिकृत पक्ष अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

अब अभिभावकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों की मांग है कि जिला प्रशासन वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान जारी सभी प्रोग्रेस रिपोर्ट कार्ड, मान्यता संबंधी दस्तावेज, संबद्धता के दावे, प्रचार सामग्री, शुल्क संरचना, भवन सुरक्षा व्यवस्था तथा जांच समिति की रिपोर्ट की स्वतंत्र और निष्पक्ष समीक्षा कराए।

पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा प्रश्न अब भी अनुत्तरित है—यदि व्यापार विहार परिसर की मान्यता, संचालन और रिपोर्ट कार्ड में अंकित विवरण पूरी तरह नियमों के अनुरूप हैं, तो फिर इन दस्तावेजों को लेकर लगातार उठ रहे सवालों का स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब अब तक क्यों नहीं दिया गया?

सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करने वाली व्यवस्था के सामने अब यह मामला एक परीक्षा की तरह खड़ा है। क्योंकि सवाल केवल एक स्कूल का नहीं, बल्कि उन हजारों अभिभावकों के भरोसे का है जो अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर व्यवस्था पर विश्वास करते हैं।

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