Friday, May 1, 2026
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वेदांता बालको की पहल से छत्तीसगढ़ के गांवों में खेती के साथ खुल रहे आय के कई रास्ते, महिलाएं और युवा बन रहे बदलाव के असली नायक…

Vedanta Limited की इकाई बालको (BALCO) द्वारा छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में चलाई जा रही आजीविका पहलें अब बदलाव की मजबूत मिसाल बनती जा रही हैं। कृषि पर अत्यधिक निर्भरता और सीमित संसाधनों से जूझते ग्रामीण परिवारों के लिए यह मॉडल आत्मनिर्भरता की नई राह खोल रहा है।

छत्तीसगढ़, जिसे ‘भारत का धान का कटोरा’ कहा जाता है, वहां की अधिकांश कृषि भूमि खरीफ सीजन में धान की खेती पर निर्भर रहती है। लेकिन वर्षा आधारित खेती और सीमित सिंचाई सुविधाओं के कारण किसानों की आय लंबे समय से अस्थिर बनी हुई थी। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए बालको ने एक समग्र आजीविका मॉडल तैयार किया, जो अब कोरबा, कवर्धा, रायगढ़, रायपुर और सरगुजा के 123 गांवों में लागू हो चुका है। इस पहल से अब तक 2 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं।

इस मॉडल की खासियत यह है कि यह केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, सूक्ष्म उद्यम और बुनियादी सुविधाओं को एक साथ जोड़कर एक मजबूत ग्रामीण इकोसिस्टम तैयार करता है।

इस पहल का सबसे प्रभावशाली पहलू महिला सशक्तिकरण है। ‘प्रोजेक्ट उन्नति’ के तहत 561 से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 6,000 से ज्यादा महिलाएं अब आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। ये महिलाएं न केवल बचत और ऋण प्रबंधन सीख रही हैं, बल्कि छोटे-छोटे व्यवसायों के जरिए नियमित आय भी अर्जित कर रही हैं।

करीब 600 महिलाएं अलग-अलग व्यवसायों से आय कमा रही हैं, वहीं 45 गांवों में 2,200 से अधिक महिलाएं नैनो-बिजनेस गतिविधियों में सक्रिय हैं। कोरबा की विजय लक्ष्मी सारथी जैसी महिलाएं अब घर से व्यवसाय चलाकर हर महीने 12 से 15 हजार रुपये तक कमा रही हैं, जो इस बदलाव की जीवंत तस्वीर पेश करती है।

ग्रामीण युवाओं के लिए भी यह पहल नई उम्मीद लेकर आई है। 2010 में स्थापित वेदांता स्किल स्कूल के माध्यम से अब तक 15,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। हर साल 1,000 से ज्यादा युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित कर रोजगार से जोड़ा जा रहा है।

देशभर के 70 से अधिक संस्थानों में इन युवाओं को प्लेसमेंट मिला है, जहां वे सालाना 2 से 3 लाख रुपये तक कमा रहे हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि अब ग्रामीण युवा केवल खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संगठित क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।

यह पहल केवल आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है। 110 ‘नंद घर’ केंद्रों के जरिए 7,000 से अधिक माताओं और बच्चों तक पोषण और शिक्षा सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। वहीं कोचिंग केंद्रों के माध्यम से सैकड़ों छात्रों को प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा रहा है।

स्वास्थ्य, स्वच्छता और बुनियादी ढांचे में सुधार से ग्रामीणों की कार्यक्षमता बढ़ी है और जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आया है। बेहतर सड़क और सुविधाओं के कारण अब बाजार और रोजगार तक पहुंच भी आसान हो गई है।

वेदांता बालको की इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि ग्रामीण परिवार अब केवल एक आय स्रोत पर निर्भर नहीं हैं। खेती के साथ-साथ छोटे व्यवसाय, कौशल आधारित रोजगार और अन्य गतिविधियों से आय के कई रास्ते खुल गए हैं।

यह मॉडल खेती का विकल्प नहीं, बल्कि उसका विस्तार है—जो किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर देकर आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित बनाता है।

भविष्य की ओर मजबूत कदम

छत्तीसगढ़ के इन गांवों में हो रहा यह परिवर्तन केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है, बल्कि एक स्थायी और सुरक्षित भविष्य की नींव रख रहा है। वेदांता बालको का यह समग्र दृष्टिकोण दिखाता है कि यदि कृषि, शिक्षा, कौशल और सामुदायिक विकास को साथ लेकर चला जाए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में व्यापक और दीर्घकालिक बदलाव संभव है।

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