बिलासपुर। देश में बढ़ते अंधविश्वास और तथाकथित बाबाओं के प्रभाव को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर का बयान एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि महिलाओं को किसी भी बाबा या स्वयंभू संत के संपर्क में आने से पहले उसकी पूरी जानकारी जरूर लेनी चाहिए और अंधविश्वास में आकर किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए।
विजया राहटकर ने चिंता जताते हुए कहा कि सबसे दुखद पहलू यह है कि आज के समय में पढ़ी-लिखी महिलाएं भी ऐसे ढोंगी बाबाओं के जाल में फंस जाती हैं। यह केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक जागरूकता की कमी को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्मविश्वास और तर्कशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए, न कि किसी चमत्कार या झूठे वादों के भरोसे।
हाल ही में महाराष्ट्र के नासिक में सामने आया कथित बाबा अशोक खैरात का मामला इस समस्या की भयावहता को उजागर करता है। इस प्रकरण में बाबा पर सैकड़ों महिलाओं के यौन शोषण का आरोप लगा है। इतना ही नहीं, शोषण से जुड़े कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि अंधभक्ति और भरोसे का गलत फायदा उठाकर किस तरह महिलाओं का शोषण किया जा सकता है।
महिला आयोग की अध्यक्ष ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न जुटा सके। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले की पुलिस जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर समाज में जागरूकता का स्तर क्यों इतना कमजोर है कि लोग आसानी से धोखे का शिकार हो जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता, वैज्ञानिक सोच और परिवार स्तर पर संवाद बेहद जरूरी है।


