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शेयर ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी: बिलासपुर से खुला अंतरराज्यीय नेटवर्क, 17 लाख की ठगी से 8 करोड़ के खेल तक पहुंचे जांच के धागे

बिलासपुर। शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों को रातों-रात अमीर बनाने के सपने दिखाने वाले साइबर ठगों का एक ऐसा अंतरराज्यीय नेटवर्क बिलासपुर पुलिस के हत्थे चढ़ा है, जिसके तार देश के कई राज्यों तक फैले हुए हैं। एक महिला से 17.21 लाख रुपये की ठगी की शिकायत से शुरू हुई जांच ने करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन, दर्जनों बैंक खातों और कई राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों का ऐसा जाल उजागर किया है, जिसने साइबर अपराध के बदलते स्वरूप को फिर सामने ला दिया है।

रेंज साइबर थाना बिलासपुर की जांच में अब तक पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ताजा कार्रवाई में गिरोह के प्रमुख सदस्य रजत तोमर को गिरफ्तार किया गया है, जिसे इस नेटवर्क का अहम संचालक माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार वह केवल बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम नहीं करता था, बल्कि लोगों को लालच देकर अपने नेटवर्क में जोड़ता और साइबर अपराध से आने वाले पैसों की आवाजाही को व्यवस्थित करता था।

मामले की शुरुआत तब हुई जब बिलासपुर की एक महिला को शेयर बाजार में भारी मुनाफे का झांसा देकर 17 लाख 21 हजार 100 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए गए। पहली नजर में यह सामान्य साइबर ठगी का मामला लग रहा था, लेकिन तकनीकी जांच और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की परतें खुलते ही कहानी कहीं बड़ी निकली।

पुलिस को पता चला कि गिरोह केवल एक-दो खातों के जरिए काम नहीं कर रहा था, बल्कि कई राज्यों में फैले बैंक खातों का इस्तेमाल कर साइबर अपराध से प्राप्त रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजकर उसका स्रोत छिपाया जा रहा था। जांच में सामने आया कि आरोपी मुकेश कुमार दास के बैंक खातों के खिलाफ देशभर में 13 साइबर शिकायतें दर्ज हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इन खातों से जुड़े संदिग्ध ट्रांजेक्शनों की राशि करीब 8 करोड़ रुपये तक पहुंचती है।

वहीं एक अन्य आरोपी संदीप कुमार चंद्रा के खाते के खिलाफ गुजरात, तेलंगाना, कर्नाटक और दिल्ली जैसे राज्यों में साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज मिलीं। इससे यह स्पष्ट हो गया कि गिरोह किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय था।

जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह सीधे लोगों से ठगी करने के साथ-साथ बैंक खातों की व्यवस्था करने का भी बड़ा नेटवर्क चला रहा था। भोले-भाले लोगों को कमीशन और अतिरिक्त आय का लालच देकर उनके बैंक खाते हासिल किए जाते थे। बाद में इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को घुमाने और निकालने में किया जाता था।

रजत तोमर की गिरफ्तारी के बाद सामने आई जानकारी बताती है कि वह खाताधारकों को दिल्ली सहित अन्य शहरों तक ले जाकर उनके खातों का उपयोग करवाता था। इससे यह संकेत मिलता है कि गिरोह ने साइबर अपराध को एक संगठित कारोबार की तरह संचालित करने की व्यवस्था बना रखी थी।

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी केशव साव के खाते में लगभग 99 लाख रुपये और शिशिर राठौर के खाते में करीब 1 लाख रुपये होल्ड कराकर संभावित नुकसान को रोकने में सफलता हासिल की। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं होता तो बड़ी राशि और भी खातों के जरिए गायब हो सकती थी।

पिछले कुछ वर्षों में शेयर बाजार और ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता बढ़ने के साथ साइबर अपराधियों ने भी अपने तौर-तरीके बदल लिए हैं। अब ठग फर्जी ट्रेडिंग ऐप, नकली निवेश सलाहकार और व्हाट्सएप-टेलीग्राम ग्रुप के जरिए लोगों को पहले छोटे मुनाफे का भरोसा दिलाते हैं, फिर बड़ी रकम निवेश करवाकर गायब हो जाते हैं। बिलासपुर में सामने आया यह मामला भी उसी पैटर्न की ओर इशारा करता है, जहां “तेजी से पैसा कमाने” का सपना लोगों के लिए आर्थिक तबाही का कारण बन गया।

बिलासपुर पुलिस की कार्रवाई ने एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश जरूर किया है, लेकिन यह मामला यह भी बताता है कि साइबर अपराधी अब तकनीकी रूप से कहीं अधिक संगठित और पेशेवर हो चुके हैं। करोड़ों रुपये के ट्रांजेक्शन, कई राज्यों में फैले बैंक खाते और लगातार बदलते डिजिटल माध्यम जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं।

फिलहाल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी जांच जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और चेहरे सामने आ सकते हैं। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि शेयर ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर मिलने वाले “गारंटीड मुनाफे” के दावे अक्सर साइबर ठगों का सबसे खतरनाक हथियार बन चुके हैं। ऐसे में जागरूकता ही इस डिजिटल जाल से बचने का सबसे बड़ा उपाय है।

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