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राहुल गांधी के दूत या अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष? बिलासपुर में इमरान प्रतापगढ़ी के दौरे ने कांग्रेस के भीतर ही खड़े कर दिए कई सवाल…

बिलासपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी का बिलासपुर दौरा जितना छात्रों के मुद्दों और पेपर लीक के खिलाफ कांग्रेस के अभियान को लेकर चर्चा में रहा, उससे कहीं ज्यादा कांग्रेस के भीतर उठ रहे सवालों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। आधिकारिक तौर पर उनका दौरा राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहे ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत था, लेकिन शहर में उनके स्वागत-सत्कार और पूरे कार्यक्रम का स्वरूप ऐसा दिखाई दिया कि कई कांग्रेस नेताओं के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि आखिर इमरान प्रतापगढ़ी राहुल गांधी के प्रतिनिधि बनकर आए थे या फिर केवल कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में?

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यदि दौरे का मूल उद्देश्य छात्रों के भविष्य, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर संवाद था, तो कार्यक्रम में छात्र संगठनों, एनएसयूआई, युवा कांग्रेस और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों की व्यापक भागीदारी अपेक्षित थी। लेकिन पूरे आयोजन में अल्पसंख्यक विभाग की सक्रियता सबसे अधिक दिखाई दी, जिससे पार्टी के कई नेताओं के मन में सवाल खड़े हो गए।

इमरान प्रतापगढ़ी ने प्रेसवार्ता में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस छात्रों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर बुलंद कर रही है। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ ‘छात्रों की गूंज’ अभियान शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर जवाबदेही तय कराने और छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए चलाया जा रहा है। कोटा से शुरू हुए इस अभियान को अब देश के 28 प्रमुख छात्र शहरों तक ले जाया जा रहा है और बिलासपुर भी उसी श्रृंखला का हिस्सा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे पेपर लीक ने लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया है। उनका दावा था कि पेपर लीक की घटनाओं के बाद 21 से अधिक छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की और कहा कि केवल छोटे आरोपियों की गिरफ्तारी से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मछली पकड़ने से काम नहीं चलेगा, मगरमच्छ पकड़ना होगा।”

प्रतापगढ़ी ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियां अपना काम करने में सक्षम हैं, लेकिन असली सवाल शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही का है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के बजाय केवल प्रचार और आयोजनों में व्यस्त है। कांग्रेस आगामी संसद सत्र में पेपर लीक के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी और जब तक दोषियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

हालांकि, प्रेसवार्ता में उठाए गए मुद्दों से अलग कांग्रेस के स्थानीय संगठन में एक अलग ही चर्चा चलती रही। कई नेताओं का मानना था कि यदि यह राहुल गांधी के राष्ट्रीय छात्र अभियान का कार्यक्रम था, तो उसके अनुरूप संगठनात्मक समन्वय और स्वरूप दिखाई नहीं दिया। वहीं कुछ नेताओं का कहना था कि पूरे दौरे में अल्पसंख्यक विभाग की छाप इतनी अधिक रही कि मूल अभियान का संदेश पीछे छूटता नजर आया।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी राष्ट्रीय अभियान की सफलता केवल बड़े नेताओं के भाषणों से नहीं, बल्कि स्थानीय संगठन की एकजुटता और स्पष्ट संदेश से तय होती है। बिलासपुर में इमरान प्रतापगढ़ी ने केंद्र सरकार को पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर घेरा जरूर, लेकिन उनके दौरे ने कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक समन्वय और नेतृत्व की प्राथमिकताओं को लेकर भी कई सवाल छोड़ दिए।

अब देखने वाली बात यह होगी कि कांग्रेस इन अंदरूनी चर्चाओं को केवल राजनीतिक फुसफुसाहट मानकर नजरअंदाज करती है या फिर भविष्य के कार्यक्रमों में संगठनात्मक संतुलन और संदेश की स्पष्टता पर भी उतना ही ध्यान देती है, जितना वह केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग कर रही है।

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