कांग्रेस का कहना है कि आयोग की ओर से 187 अभ्यर्थियों के न्यूनतम निर्धारित अंक हासिल नहीं कर पाने की बात कही जा रही है, जबकि कुछ अभ्यर्थियों का दावा है कि उनके अंक निर्धारित सीमा के अनुरूप हैं। कांग्रेस ने मांग उठाई है कि इंटरव्यू शुरू होने से पहले पूरी स्थिति स्पष्ट की जाए और अभ्यर्थियों को उनकी उत्तर-पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वे खुद देख सकें कि मूल्यांकन में उन्हें कितने अंक और किस आधार पर दिए गए।
मामला सिर्फ 608 बनाम 795 की संख्या तक सीमित नहीं है। कांग्रेस ने वर्ष 2024 की मुख्य परीक्षा की कुछ उत्तर-पुस्तिकाओं का हवाला देते हुए मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी के अनुसार, कुछ मामलों में समान या सही उत्तर लिखने वाले अभ्यर्थियों को अलग-अलग अंक दिए गए। कांग्रेस ने ऐसे उदाहरण सामने रखे हैं, जिनमें एक अभ्यर्थी को 2 अंकों के प्रश्न में शून्य अंक मिलने, जबकि दूसरे अभ्यर्थी को उसी प्रश्न में पूरे 2 अंक मिलने का दावा किया गया है।
‘भक्तिन माता राजिम’ से जुड़े प्रश्न के मूल्यांकन को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाया है। पार्टी के मुताबिक एक अभ्यर्थी को 8 में से 3.5 अंक मिले, जबकि दूसरे उत्तर में कथित रूप से गलत जवाब होने के बावजूद अंक दिए गए। इसी तरह छत्तीसगढ़ में होम रूल लीग की स्थापना से जुड़े प्रश्न में भी अंक देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस ने मूल्यांकन में असमानता का आरोप लगाया है।
घरेलू हिंसा से जुड़े प्रश्न और बौद्ध धर्म के ‘महाभिनिष्क्रमण’ से संबंधित प्रश्नों के मूल्यांकन को लेकर भी कांग्रेस ने कथित विसंगतियों का मुद्दा उठाया है। पार्टी का कहना है कि अलग-अलग उत्तर-पुस्तिकाओं में समान अथवा सही-गलत उत्तरों के बावजूद दिए गए अंकों में अंतर दिखाई देता है। कांग्रेस ने इन उत्तर-पुस्तिकाओं की निष्पक्ष जांच और पुनर्मूल्यांकन की मांग की है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है, इसलिए मूल्यांकन संबंधी आरोपों पर पीएससी का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण होगा।
कांग्रेस ने वर्ष 2024 की पीएससी परीक्षा का हवाला देते हुए भी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का दावा है कि उस समय भी इंटरव्यू के लिए निर्धारित 1:3 अनुपात के अनुसार अभ्यर्थियों का चयन नहीं हुआ था और 95 अभ्यर्थियों को कम बुलाया गया था। इसके अलावा कांग्रेस ने 2024 में उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए मूल्यांकनकर्ताओं की पात्रता और उनकी गोपनीयता को लेकर भी आरोप लगाए हैं। इन आरोपों पर भी स्वतंत्र पुष्टि इस समय उपलब्ध नहीं है।
कांग्रेस ने साफ कहा है कि जब तक इन सवालों का निराकरण नहीं होता, तब तक इंटरव्यू प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए। पार्टी ने सभी अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाएं सार्वजनिक अथवा उपलब्ध कराने, मूल्यांकन के स्पष्ट मानदंड तय करने, प्रत्येक विषय के मॉडल उत्तर जारी करने और मुख्य परीक्षा की उत्तर-पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग की है। साथ ही इंटरव्यू के लिए पदों की संख्या के तीन गुना अभ्यर्थियों के चयन के अनुपात को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
बिलासपुर में भी इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेताओं ने अभ्यर्थियों की मांगों और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता का सवाल उठाया है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा, ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री, पूर्व विधायक शैलेश पांडेय, विजय पांडेय, नरेंद्र बोलर, शाहनवाज, रविंद सिंह और राकेश तिवारी सहित नेताओं ने मामले में सरकार और आयोग से जवाब मांगा है।
पीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षा में एक-एक अंक अभ्यर्थियों के भविष्य पर सीधा असर डालता है। ऐसे में 265 पदों के मुकाबले 795 के अनुपात और 608 अभ्यर्थियों के चयन के बीच का अंतर अब पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल बन गया है। इसके साथ ही उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर लगाए गए आरोपों ने पारदर्शिता की मांग को और तेज कर दिया है।
अब निगाहें पीएससी और सरकार के आधिकारिक जवाब पर हैं। यदि आयोग 187 अभ्यर्थियों के बाहर होने का आधार, न्यूनतम अंक, मूल्यांकन प्रक्रिया और 1:3 अनुपात की स्थिति दस्तावेजों के साथ स्पष्ट करता है, तो विवाद के कई सवालों का जवाब सामने आ सकता है। फिलहाल कांग्रेस के आरोपों के बीच अभ्यर्थी उत्तर-पुस्तिकाएं सार्वजनिक करने और पुनर्मूल्यांकन की मांग पर अड़े हैं, जबकि परीक्षा प्रक्रिया की अंतिम स्थिति आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही साफ होगी।


