
बिलासपुर। अंधविश्वास और शक जब इंसानियत पर हावी हो जाए तो उसका नतीजा हिंसा के रूप में सामने आता है। बिलासपुर के कोनी थाना क्षेत्र अंतर्गत देवनगर में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां श्मशान घाट में तंत्र-मंत्र करने के संदेह में एक युवक के साथ मारपीट की गई। युवक की मौजूदगी कुछ लोगों को संदिग्ध लगी और देखते ही देखते शक ने हिंसक रूप ले लिया। मारपीट में घायल युवक को उपचार के लिए सिम्स अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
मिली जानकारी के अनुसार, युवक अपने एक परिचित के साथ घर के समीप स्थित श्मशान घाट गया हुआ था। इसी दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों को उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ। उन्हें युवक के तंत्र-मंत्र करने की आशंका हुई और इसी शक के आधार पर उसके साथ मारपीट शुरू कर दी गई। घटना के बाद घायल युवक को उपचार के लिए सिम्स अस्पताल पहुंचाया गया।
मामले में कोनी पुलिस ने अपराध क्रमांक 601/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 115(2), 351(3) एवं 3(5) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में उमेश सिंह ठाकुर (32 वर्ष), पिता बलवंत सिंह ठाकुर, राजा यादव (26 वर्ष), पिता विजय यादव और नितेश यादव (23 वर्ष), पिता स्व. देवकुमार यादव, तीनों निवासी दैहानपारा, छोटी कोनी, थाना कोनी, जिला बिलासपुर की संलिप्तता सामने आई है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों के विरुद्ध आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले सभी व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सवाल यह है कि किसी व्यक्ति की गतिविधि संदिग्ध लगने या तंत्र-मंत्र करने का शक होने मात्र से क्या किसी को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार मिल जाता है? यदि किसी को युवक की गतिविधियों पर संदेह था तो इसकी सूचना पुलिस को दी जा सकती थी। लेकिन शक के आधार पर मारपीट करना कानून व्यवस्था को चुनौती देने जैसा है। अंधविश्वास हो या कोई अन्य संदेह, किसी भी परिस्थिति में हिंसा को जायज नहीं ठहराया जा सकता।

